भोपाल: सीएम ने दो साल पहले वन विभाग के अंतर्गत उसके डिपो से लकडिय़ों का मेनुअल के स्थान पर ऑनलाईन नीलाम करने के निर्देश दिये थे और इसका क्रियान्वयन 1 दिसम्बर 2021 से करने के लिये कहा था। परन्तु लम्बे समय तक वन विभाग इस कार्य को नहीं कर पाया, परन्तु अब उसने ई-आक्शन की व्यवस्था शुरु कर दी है परन्तु वह भी अधूरी।
लकडिय़ों की ऑनलाईन नीलामी में सिर्फ धरोहर राशि ही जमा हो रही है तथा अधिक दर देने वाले ठेकेदार से नीलामी की राशि ऑनलाईन लेने की पोर्टल पर व्यवस्था नहीं की गई है। इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि स्टेट ट्रेजरी से यह राशि जमा कराने का एक्सेस नहीं मिल पाया है।
जब यह एक्सेस मिल जायेगा, तब नीलामी की पूरी राशि भी पोर्टल के माध्यम से जमा की जायेगी। फिलहाल नीलामी की राशि बैंक ड्राफ्ट आदि के माध्यम से ठेकेदार से ली जा रही है। अभी पोर्टल के माध्यम से जो धरोहर राशि मिल रही है उसे संबंधित बैंक ई-चालान के जरिये ट्रेजरी में जमा कर रहा है।
यह भी है समस्या :
राज्य सरकार ने अपना ई-ट्रेजरी साफ्टवेयर वर्ष 2013 में दस साल के लिये बनाया था जिसकी मियाद इसी साल खत्म हो रही है। नया ई-ट्रेजरी साफ्टवेयर बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बनने पर ही वन विभाग का ई-आक्शन सिस्टम इससे जुड़ पायेगा।
इन राज्यों में हो रहा है ई-आक्शन :
देश के उप्र, उत्तराखण्ड एवं कर्नाटक में लकडिय़ों की नीलामी ऑनलाईन हो रही है। महाराष्ट्र में भी यह व्यवस्था ऑनलाईन थी परन्तु अब वहां बंद हो गई है क्योंकि उसने निजी क्षेत्र के माध्यम से ऑनलाईन व्यवस्ािा बनाई थी जिसमें निजी क्षेत्र भारी भरकम कमीशन वसूल रहा था।
हालांकि उप्र एवं उत्तराखण्ड में भी निजी क्षेत्र को यह कार्य सौंपा गया है। मप्र में सरकारी उपक्रम स्टेट इलेक्ट्रानिक विकास निगम के माध्यम से ई-आक्शन व्यवस्था बनाई गई है जिसमें कोई कमीशन नहीं दिया जाता है। राज्य के वन विभाग ने नई दिल्ली में स्थित अपने वन डिपो को भी ई-आक्शन से नहीं जोड़ा है और वहां नीलामी मेनुअली हो रही है।