मप्र में विस चुनाव का एलान अभी दूर है, इसके पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच मानसून के मौसम में ही प्री-इलेक्शन वॉर तेज होने वाला है। भाजपा ने मोदी की ब्रॉडिंग के लिए थीम सांग से लेकर कई नये प्रचार-प्रयोग करने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं कांग्रेस में 21 जुलाई को ग्वालियर में प्रियंका गांधी की सभा के बाद कैंपेन में नयी धार दिखेगी। दरअसल इस बार भाजपा मप्र में पूरी ताकत से पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी वहीं कांग्रेस में हिमाचल प्रदेश की तरह प्रियंका गांधी मुख्य कैपेनर होंगी। माना जा रहा है कि मप्र में मोदी शुरूआती दौर से ही 'पिक्चर' में नजर आयेंगे, गौरतलब है कि हाल में कर्नाटक के चुनाव में उनकी ऐंट्री लगभग आखिरी दौर में हुई थी। 

हालांकि ऐक सूत्र का कहना है कि यह तभी संभव होगा, जब अक्टूबर में भाजपा की मैदानी हालत की रिपोर्ट 'संतोषजनक' रहेगी। इससे पहले चुनाव प्रभारी व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव यहां मैदान तैयार करने का काम सौंपा गया है। अगले सप्ताह दोनों फिर मप्र भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक लेने वाले हैं। इसके बाद अमित शाह फिर से विस्तृत समीक्षा करेंगे। उल्लेखनीय है कि नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने और नेताओं को एकजुट रहने का संदेश वे पहले ही देकर जा चुके हैं।

टिकट को लेकर भाजपा में खलबली मची

दूसरी तरफ भाजपा में मौजदा विधायको में अपने टिकट को लेकर जमकर खलबली मच गई है। क्योंकि दो दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने विधायकों की बैठक में यह पूछ लिया था कि कौन- कौन चुनाव लड़ना चाहता है? तब सभी विधायकों ने सहमति में हाथ खड़े कर दिये थे। इस बात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि भाजपा अपने फीडबैक के मुताबिक लगभग सत्तर मौजूदा विधायकों के टिकट बदलकर नये चेहरों को सामने लाना चाहती है। लेकिन दीपक जोशी के कांग्रेस मे पलायन के बाद उसे यह भी आशंका है कि टिकट कटने के बाद उसके नेता दूसरे दल का दामन न थाम लें। 

विंध्य में नारायण त्रिपाठी की पार्टी और मप्र के कुछ इलाकों मैं केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी ऐसे लोगों का विकल्प बन सकती है। इससे भाजपा को भी नुकसान हो जायेगा। लिहाजा भाजपा फिर से कमजोर नजर आने वाले विधायकों के क्षेत्र व हालातों का अपने स्तर पर सर्वे व समीक्षा करने वाली है। उसका कहना है कि विधायक सीट जिताने की गारंटी वजह समेत बतायें। शिवराज भी कह चुके हैं कि पार्टी सिर्फ हारने के लिए टिकट नहीं देगी।

कांग्रेस का ग्वालियर कूच

उधर कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं का फोकस अब सिर्फ ग्वालियर पर है। यहां 21 को प्रियंका की सभा को बड़ा सियासी जलसा बनाने के लिये उसने पूरी ताकत व संसाधन झोंक रखे हैं। वहां खुद कमलनाथ के अलावा दिग्विजय सिंह, डा गोविद सिंह, सतीश सिकरवार, अशोक सिंह सभा के लिये मुख्य भूमिका में हैं। यह सभा हाल में अरविंद केजरीवाल की सभा के असर को खत्म करने के लिहाज से भी तय की गई है। 

यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस से बगावत' के बाद कांग्रेस उन्हें सीधी चुनौती देकर विस चुनाव से पहले 'माइड गेम' खेलने के मूड में हैं। इसके बाद शहडोल जिले के ब्यौहारी में अगस्त महीने में राहुल गांधी की सभा होगी। यहां हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभा करके गये है, यह आदिवासी वर्ग में भाजपा की पैठ को मजबूत करने का प्रयास माना गया है। ब्यौहारी के बाद सागर जिले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा की भी तैयारी की जा रही है।