मप्र अजब है : वन विभाग के अफसरों को बताना पड़ रहें है पौधारोपण के गुर


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स्टोरी हाइलाइट्स

वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव के हस्ताक्षर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि विकास, कैंपा /ग्रीन इंडिया मिशन एवं अन्य शाखाओं द्वारा कराए जाने वाले वृक्षारोपण कार्य में अनिवार्य रूप से जारी निर्देशों का पालन कड़ाई से पालन किया जाय..!!

भोपाल: मप्र अजब है। अजब इसलिए कि स्थापना के डेढ़ सौ साल बाद वन बल प्रमुख को अपने फील्ड के अफसरों को पौधारोपण के गुर बताने पड़ रहें है। इसके लिए वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने मंगलवार को एक सरकुलर जारी किया है। हालांकि इस सरकुलर यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब से पहले तक हुए पौधरोपण में इन मापदंडों  का पालन नहीं किया गया..?

वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव के हस्ताक्षर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि विकास, कैंपा /ग्रीन इंडिया मिशन एवं अन्य शाखाओं द्वारा कराए जाने वाले वृक्षारोपण कार्य में अनिवार्य रूप से जारी निर्देशों का पालन कड़ाई से पालन किया जाय। निर्देश में कहा गया है कि यदि क्षेत्र का घनत्व 0.4 से अधिक है, तो वृक्षारोपण न किया जाये। इसी प्रकार से वृक्षों के छाया (12 Noon Shade) के नीचे न तो कोई गडढा किया जावे और न ही उन गडढों में पौधा लगाया जावे।

श्रीवास्तव ने यह भी कहा है, कि बिगड़े वनों के सुधार वाले समस्त क्षेत्र में कट बैक ऑपरेशन (CBO) कार्य, उपलब्ध 20 सेमी. से अधिक एवं 100 सेमी. से कम गोलाई तक के समस्त जीवित ठूंठ एवं पेड़ के बड़े ठूँठ की कटाई जमीन की सतह से कराई जावे। रीजनरेशन अथवा जीवित ठूंठ के 2-3 मीटर से दूर गडढा किया जावे। मुख्यालय द्वारा निर्धारित मानक आकार के पौधों का ही लिया जावे। लघु वनोपज संघ द्वारा लघु वनोपज प्रजातियों के संरक्षण हेतु अंतः स्थलीय / बाह्य स्थलीय संरक्षण (In-situ/Ex-situ Conservation) की परियोजनायें  स्वीकृत की जाती हैं। 

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इसके  लिए भी जारी निर्देशों का पालन किया जाय। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भ्रमण के दौरान मुख्यालय से जारी किए गए बिंदुओं का पालन किया गया है, इसका अनिवार्य रूप से निरीक्षण किया जाए। यानि सीसीएफ और एपीसीसीएफ वृक्षारोपण स्थलों का निरीक्षण करें और जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। 

एक आला अफसर पहले ही खोल चुके थे पोल

यहां यह उल्लेखनीय है कि ग्रीन इंडिया मिशन और वनीकरण क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत 0.4 घनत्व वाले वन क्षेत्र में पौधारोपण के कार्य कराए गए हैं। पूर्व में पीसीसीएफ एचयू खान ने करीब साल भर पहले ही बैतूल और होशंगाबाद भ्रमण के दौरान इस बात को उजागर किया था कि ग्रीन इंडिया मिशन के अंतर्गत वृक्षारोपण 0.4 घनत्व वाले वन क्षेत्र में कराए गए है। तब तत्कालीन वन बल प्रमुख और ग्रीन इंडिया मिशन के तत्कालीन डायरेक्टर के रमन ने उनके पत्र को गंभीरता से लिया था। बाद में एक रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ कि कतिपय अधिकारी अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए 0.4 घनत्व वाले वन क्षेत्र और छायादार वृक्षों के नीचे जगहों पर  वृक्षारोपण करते हैं।