भोपाल: भारत चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों के दौरान मतदान व सुरक्षा कर्मियों की मृत्यु या गंभीर चोट में सहायता देने के नये प्रावधान जारी किये हैं।
जारी नये प्रावधानों के अनुसार, अब चुनाव ड्यूटी की अवधि चुनावों की घोषणा से लेकर चुनाव परिणाम आने तक मानी जायेगी। किराये पर लिये गये वाहन चालक, क्लीनर्स आदि व ईवीएम के संधारण में लगाये गये इंजीनियर्स भी मतदान कर्मी माने जायेंगे।
चुनाव ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने या गंभीर चोट लगने पर सहायता का प्रकरण जिला निर्वाचन अधिकारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस दिन के अंदर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेजेंगे जो एक माह के अंदर इस पर निर्णय लेंगे। चुनाव में लगे कर्मियों के इलाज हेतु अस्पतालों में पहले से ही व्यवस्था की जायेगी तथा इलाज कैशलेस होगा।
लोकसभा, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के चुनाव में सहायता राशि का वहन पहले राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा और बाद में भारत सरकार से शतप्रतिशत प्रतिपूर्ति की जायेगी जबकि विधानसभा चुनाव में सहायता राशि केंद्र एवं राज्य 50-50 प्रतिशत के अनुपात में वहन करेंगे।