भोपाल: राज्य सरकार ने शहरों में सडक़ किनारे लगे वृक्षों की सुरक्षा के लिये सभी नगरीय निकायों को नये दिशा-निर्देश जारी किये हैं जिसमें कहा गया है कि शहरों में सीमेंट कांक्रीट/डामरीकृत रोड एवं फुटपाथ पेवर ब्लॉक के आसपास लगे पेड़ों के चारों तरफ न्यूनतम एक मीटर गोलाई की जगह में समेंटीकरण/डामरीकरण/पेवर ब्लॉक नहीं लगाये जायें।

एनजीटी के आदेश एवं केंद्र सरकार के आग्रह पर जारी इन दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि जिस जगह पेड़ के तने तक सीमेंटीकरण/डामरीकरण हो चुका है, वहां पेड़ से एक मीटर के घेरे में सीमेंटीकरण/डामरीकरण तोड़ा जाये। साथ ही नये पेड़ लगाने के लिये न्यूनतम डेढ़ मीटर गोलाई की जगह छोड़ी जाये। सडक़ों की चौड़ाई पेड़ों के तने तक नहीं होना चाहिये, ताकि कच्चा एरिया बारिश का पानी सोख सके एवं जीव-जंतुओं को कम तापमान में बैठने का स्थान प्राप्त हो सके।

दिशा-निर्देश में कहा गया है कि रोड साईड पेवमेंट को बनाने के लिये कांक्रीट एवं टाईल का प्रयोग न करें, पोरस मीडियम जैसे पेवर ब्लॉक का प्रयोग करें। शहरों में वृक्षारोपण के लिये विभिन्न स्थानीय पेड़ों का चयन करें, घास एवं मिट्टी की अनावश्यक खुदाई एवं सडक़ के किनारे के पेड़-पौधों की अनावश्यक छटाई न करें। झाड़ी एवं सूखी पत्तियों को एकत्रित कर जलाया न जाये, इनका उपयोग ज3ैविक खाद बनाने में करें और शहर के पेड़-पौधों हेतु जैविक खाद का ही प्रयोग होना चाहिये। शहर के ऐसे रिक्त स्थान जहां अगले कुछ वर्षों में निर्माण कार्य नहीं होना है, उसे ग्रीन स्पेस के रुप में विकसित किया जाये। प्रदेश के विभिन्न स्थानों में भू-जल पर अतिरिक्त निर्भरता के कारण भू-जल का स्तर गिरता जा रहा है, इसलिये ऐसे स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वृक्षारोपण एवं उपचारित जल का पुन: प्रयोग किया जाये व अनावश्यक कांक्रीटीकरण से बचा जाये।

दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि प्रदेश के शहरों में भारी वर्षा के चलते बाढ़ की समस्या बढऩे के छह कारण हैं : 

1. बिना स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम की प्लानिंग के शहरीकरण। 

2. जरुरत से ज्यादा अनावश्यक कांक्रीटीकरण के कारण बारिश का पानी भूमि सोख नहीं पाती और बाढ़ में परिवर्तित हो जाती है। 

3. सडक़ों की मरम्मत के चलते उनकी हाइट बढऩे से पिलिंथ सिंक कर जाती है। 

4. शहर के नाले सफाई में लापरवाही के चलते डीमोलिशन एवं सीमेंट के वेस्ट से चौक हो जाते हैं। 

5. अतिरिक्त रेत एवं मिट्टी बाढ़ के पानी से बहते हुये शहर के नदी-तालाबों में एकत्रित होकर जलस्तर को कम करते हैं। 

6. शहर के ड्रेनेज सिस्टम के व्यवस्थित तरीके से शहर के नदी-तालाबों से जुड़े नहीं होना, बाढ़ की समस्या को और बढ़ाता है। इसलिये प्रदेश के शहरों के ग्रीन कवर में सुधार एवं बाढ़मुक्त बनाने के लिये उक्त बिन्दुओं को ध्यान में रखकर कार्य किया जाये।