राजधानी से गुजरने वाली ट्रेनों में बीमार यात्रियों व बच्चों को मदद करने में भोपाल कभी पीछे नहीं रहा। एक बार फिर भोपाल ने आधी रात को एक महिला यात्री को आक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवाकर मिसाल पेश की है। महिला कानपुर के किदवई नगर से कापाटी जा रही थी, जो ट्रेन के ए-2 कोच में 47 बर्थ पर यात्रा कर रही थी, उसकी तबीयत खराब थी और आक्सीजन लगा हुआ था।
सिलेंडर खत्म होने वाला था उन्होंने मदद मांगी तो भोपाल के कुछ लोग एक एनजीओ की मदद से आधी रात को स्टेशन पर दो सिलेंडर लेकर पहुंच गए और महिला यात्री को उपलब्ध कराए गए। जिसके बाद महिला व उनके परिजनों ने शुक्रिया कहा है। उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी कोरोना काल में एक महिला की छोटी से बेटी को दूध की जरूरत थी जो कि आरपीएफ जवान ने चलती हुई ट्रेन में जान जोखिम में डालकर उपलब्ध कराया था।
ज्ञात हो कि रेलवे यात्रियों की जरूरत की सूचना एनजीओ व समा सेवी लोगों को साझा करता है, रेलवे से प्राप्त जानकारी के मुताबिक राप्ती सागर एक्सप्रेस में मंगलवार को 62 वर्षीय तृप्ति गौर अपने परिजनों के साथ कटपाटी जा रही थी । बीमार है और वेल्लोर के किसी अस्पताल में दिखाने के लिए जा रहे थे। तृप्ति को पूर्व से आक्सीजन लगा हुआ था।
परिजनों ने रेलवे को दूरभाष पर बताया कि सिलेंडर में कुछ ही गैस बची हुई थी, उनके पास अतिरिक्त सिलेंडर भी नहीं है इस तरह उन्होंने रेलवे से सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात कही। जिस पर भोपाल रेल मंडल जुट गया। रात करीब 12.30 बजे सिलेंडर बुलवाया। कुछ समय बाद ट्रेन भी भोपाल पहुंच गई थी।
इंतजार कर रहे थे डाक्टर
भोपाल स्टेशन पर तैनात डिप्टी एसएस अखिलेश खरे ने बताया कि महिला यात्री, जो कि मरीज थी उनके बारे में सूचना मिली तो अधिकारियों को बताया और रेलवे अस्पताल को सूचना दी। तब तक वहां से एक टीम पहुंच गई थी। ट्रेन के पहुंचने पर एक टीम ने सिलेंडर उपलब्ध कराया तो डॉक्टरों ने जांच की। जिसमें मरीज की तबीयत ठीक मिली। इसी बीच दूसरा सिलेंडर लगाया गया और ट्रेन को रवाना कर दिया गया।
इन्होंने उपलब्ध कराया सिलेंडर: जानकारी के मुताबिक सीपीएसडी हेल्थ केयर फाउंडेशन के अभिषेक मकवानी, निहाल सिंह आक्सीजन सिलेंडर लेकर स्टेशन पहुंचे थे। उनके साथ अन्य लोग भी थे। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी उक्त फाउंडेशन द्वारा यात्रियों की मदद की जाती रही है। डीआरएम सौरभ बंदोपाध्याय का कहना है कि रेल मंडल की कोशिश रही है कि किसी भी जरूरत मंद रेल यात्रियों को परेशानी न हो। जहां तक संभव हो सके उनकी मदद की जाए।