विधानसभा चुनाव की चिंता भाजपा में किस कदर गहरा रही है इसकी बानगी यह है कि आज पार्टी के कोर ग्रुप की महीने भर में ही तीसरी बैठक हो रही है। इस बैठक के बाद पार्टी के भीतर कसावट से लेकर राज्य मंत्रिपरिषद के भावी रूपरंग और नयी जवाबदारियों पर भी विचार होगा। यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें मुख्यमंत्री समेत तमाम दिग्गज भाग ले रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के जमीनी नेताओं की संगठन और सरकार से नाराजगी पार्टी के शीर्ष नेताओं को अब बहुत अखरने लगी है। लिहाजा प्रदेश प्रभारी, अध्यक्ष व मुख्यमंत्री अब ऐसे नेताओं को मनाने में जुटे है।
जमीनी स्तर पर पार्टी की स्थिति पर मिली रिपोर्ट पर आज कोर ग्रुप मंथन करने बैठ रहा है। पार्टी ने हालातों का जायजा लेने व रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी 14 नेताओं को सौंपकर उन्हें जिले आवंटित किए थे। यह नेता राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवकुमार को सौपेंगे, जिनकी रिपोर्ट पर एक्शन लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में इन्ही नेताओं की फीडबैक रिपोर्ट पर मंथन होगा । वस्तुतः यह रिपोर्ट प्रकारांतर से भाजपा के हालातों का सर्वे भी है। इसके आधार पर विधायकों की स्थिति व पार्टी कॉडर की सक्रियता व लोगों की नाराजगी के मुद्दे सामने आ जायेंगे।
हारी हुई सीटों पर हार गए प्रभारी !
अभी तक इन नेताओं की जितनी भी बैठकें हुई हैं, उनमें मुख्य रूप से मंत्रियों और विधायकों द्वारा उपेक्षा करने की शिकायतें हो रही हैं। सबसे ज्यादा नाराजगी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले जिलों में भी उभरी है। यहां पूर्व संगठन मंत्री माकन सिंह कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। इसी तरह विंध्य और महाकोशल में भी भाजपा को हालात ठीक नहीं नजर आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि हारी हुई सीटों पर जो प्रभारी बनाये गये थे वे भी इन पर काम करने के इच्छुक नहीं है और पार्टी से गुहार कर रहे हैं कि यह दायित्व उनसे वापस ले लिया जाये ।
कार्यकर्ताओं में इमोशन की तलाश
बताया जाता है कि चुनावी साल में भी कार्यकर्ताओं में वैसा उत्साह नहीं नजर आ रहा है। जैसा पिछले चुनाव में देखा गया था। मुख्यत कार्यकर्ताओं में हमारी सरकार' जैसे इमोशन का अभाव है। दूसरी तरफ कांग्रेस की तैयारियों पर भी भाजपा की नजरें हैं तथा उसे लेकर भी चिंतायें हैं। गौरतलब है कि सरकार से सिर्फ एक मंत्री गोपाल भार्गव को यह जिम्मेदारी दी गई है। उनके अलावा इस सूची में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित अनुभवी नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। इन नेताओं को उनका क्षेत्र छोड़कर अन्य जिलों की जिम्मेदारी इसलिए दी गई है, ताकि असंतुष्ट खुलकर बात कर सकें।
नड्डा ने दी थी नसीहत
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पिछले भोपाल दौरे के मौके पर भी नेताओं से कहा था कि कार्यकर्ता पर विश्वास करना ज्यादा ठीक है। कोर ग्रुप की बैठक में बहुत सारी नसीहतें भी नेताओंको दी थीं। नड्डा ने यह तंत्र पर कम, भी कहा था कि चुनाव नजदीक आ रहा है। 5 महीने का इलेक्शन ब्लू प्रिंट जल्दी से जल्दी बनाया जाए। उसी के हिसाब से आगे काम करो। ध्यान रहे कि इसमें सभी की भागीदारी रहे। बैठक में जो तय हो, उसे तत्काल क्रियान्वित करें। हर रोज क्या करोगे, इस पर काम होना चाहिए।