इंदौर में बजरंग दल के प्रदर्शन और लाठीचार्ज के बाद चल रहे विवाद पर आज रात तक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इससे पहले इंदौर पुलिस ने सोशल मीडिया पर 'खाकी का भी तो मान है ना' कैंपेन शुरू कर दिया है। जिसे सरकार के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
कई पुलिसकर्मियों ने इस स्लोगन को व्हाट्सएप पर स्टेटस भी बना लिया है। मप्र में शायद यह पहला मौका है जब पुलिस की भावनाएं इस तरह खुलकर सामने आई हैं। अब सरकार के सामने दुविधा यह है कि वह 70 हजार पुलिसकर्मी के साथ नज़र आये या बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के साथ?
पुलिस का साफ कहना है कि बजरंगियों ने शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर एक घंटे तक जाम लगाए रखा, फिर डीसीपी के साथ मारपीट की। पुलिस बल और अधिकारी शहर के निवासियों के लिए थे और यातायात को नियंत्रित करने के साथ-साथ कानून व्यवस्था बनाए रखते थे, तो उन्हें अपना कर्तव्य निभाने के लिए कैसे दंडित किया जा सकता है?
गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस ने 250 बजरंगियों के खिलाफ बलवा और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, जबकि बजरंग दल ने डीसीपी धर्मेंद्र भदौरिया, एसीपी पूर्ति तिवारी समेत चार टीआई और मौके पर तैनात 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था।