भोपाल: राज्य सरकार द्वारा बनाये नये पेसा नियमों के तहत इस साल बीस जिलों की 268 ग्राम सभाओं द्वारा अपनी सहमति से स्वयं के द्वारा किया गया तेंदूपत्ता संग्रहण, प्रतिकूल मौसम के कारण कम हुआ है। इन बीस जिलों में बैतूल की 27, छिन्दवाड़ा की 44, मण्डला की 6, डिण्डौरी की 19, नर्मदापुरम की 6, अनूपपुर की 10, शहडोल की 25, उमरिया की 5, सिवनी की 18, सीधी की 7, बड़वानी की 13, खरगौन की 8, खण्डवा की 4, बुराहनपुर की 9, रतलाम की 6, बालाघाट की 14, धार की 23, श्योपुर 5, अलीराजपुर की 11 एवं झाबुआ की 8 ग्रामसभाओं ने इस बार स्वयं से तेंदूपत्ता संग्रहण किया था जबकि इससे पहले पूरे प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य वन विभाग की इकाई लघु वनोपज संघ द्वारा की जाती थी।

लघु पनोपज संघ के अपर प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर द्वारा तैयार एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण की दृष्टि से मौसम अत्यत ही प्रतिकूल रहा है तथा माह अप्रैल-मई 2023 में भी कई बार वर्षा हुई है एवं बादल छाये रहे तथा तापमान ज्यादातर 40 डिग्री से कम ही रहा है। यह तेंदूपत्ता के अच्छे उत्पादन के लिये बहुत ही प्रतिकूल स्थिति है जिसके फलस्परुप इन 268 ग्रामसभाओं द्वारा संग्रहण की अनुमानित मात्रा 28 हजार 10 मानक बोरा के विरुध्द 13 हजार 357 मानक बोरा अर्थात 48 प्रतिशत तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया। इस तेंदूपत्ता संग्रहण से संग्राहकों को जहां 4 करोड़ रुपये की राशि संग्रहण पारिश्रमिक के रुप में प्राप्त हुई है, वहीं 3 करोड़ 19 लाख रुपये की राशि लाभ के रुप में प्राप्त होगी। 

इस प्रकार, संग्रहण दर रुपये 3 हजार प्रति मानक बोरा के साथ-साथ लगभग औसतन प्रति मानक बोरा रुपये 1900 प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) के रुप में प्राप्त होगा। रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि चूंकि पैसा नियम के तहत कुछ ग्रामसभाओं द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण का प्रथम वर्ष था जिसमें ग्रामसभाओं द्वारा उत्साहपूर्वक कार्य किया गया, इसलिये भविष्य में इसमें और भी अधिक गुणात्मक सुधार होना निश्चित है।