भोपाल: यह मध्यप्रदेश वासियों के लिए गहरे संकट का विषय है कि राजस्व की आय लगातार घट रही है और सरकार हर दिन भारी मात्रा में बाजार से कर्ज उठा रही है। इस कारण मध्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक पर कर्ज का भारी भरकम बोझ लादा गया है। इस वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने कुल 8,000 करोड रुपए का कर्ज उठाया है ।
प्रदेश के प्रत्येक नागरिक पर 85 हजार की कर्ज़ राशि लादी जा रही है। शासन द्वारा संचालित वे योजनाएं जिनमें हितग्राहियों को बिना किसी श्रम के प्रतिमाह राशि दी जाती है, उनकी संख्या भी अब 116 हो गई है। इससे काम के बदले वेतन पाने वाले कर्मचारी और कर देकर सुविधा पाने वाले आम नागरिकों में गहरा रोष देखा गया है।
शासन के अपने व्ही आई पी पर होने वाले खर्च, जनप्रतिनिधियों के लंबे चौड़े वेतन भत्ते और सुख सुविधाओं पर होने वाला खर्च बिना किसी रोक-टोक के बढ़ता जा रहा है। यही नहीं सरकार के इवेंट्स पर बेतहाशा खर्च किए जा रहे हैं और अब तो मुफ्तखोरी का यह आलम है कि महिलाएं, बच्चे, युवा, बुजुर्ग, किसान , विद्यार्थी सभी को बिना काम के घर बैठे योजनाओं के जरिए पैसा मिल रहा है।
राज्य सरकार ने फिर से बाजार से एक हजार करोड़ रुपयों का नया कर्ज उठाया। कर्ज दो हिस्सों में उठाया गया है जिसके लिये रिजर्व बैंक के मुम्बई कार्यालय के माध्यम से गवर्मेन्ट सिक्युरिटीज का विक्रय किया गया है।
पहला कर्ज 500 करोड़ रुपयों का है जिसका पूर्ण भुगतान 12 साल बाद किया जायेगा और इस बीच साल में दो बार कूपन रेट पर ब्याज का भुगतान किया जायेगा। जबकि दूसरा कर्ज भी 500 करोड़ रुपयों का है जिसका पूर्ण भुगतान 16 साल बाद किया जायेगा और इस कर्ज पर साल में दो बार 7.46 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज का भुगतान किया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 7 सितम्बर की सूचना से बाजार से 1 हजार करोड़ रुपयों का कर्ज लिया गया था। वर्तमान वित्त वर्ष में राज्य सरकार बाजार से कुल आठ हजार करोड़ रुपयों का कर्ज ले चुकी है। उस पर कर्ज का कुल भार 3 लाख 31 हजार 651 रुपये से ज्यादा का हो गया है।