मप्र में विस चुनाव के लिये सत्ताधारी भाजपा जहां हरसंभव प्रयोग कर रही है, नये चेहरों को मैदान में सामने लाने के प्रयास भी जारी हैं, कार्यकर्ताओं की बेचैनी व असंतोष को भी साधने का प्रयास हो रहा है तो वहीं कांग्रेस ने अपने एक पुराने चेहरे को फिर समन्वय की जिम्मेदारी दे दी है। इसके लिये दिग्विजय सिंह अगले महीने टिकट वितरण के पहले और बाद सभी दावेदारों व उम्मीदवारों के बीच समन्वय बनाने के मिशन में जुटने वाले हैं।

जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल का जिम्मा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ही संभालेंगे। दरअसल, कांग्रेस की जनआक्रोश यात्रा में कई जगह आपसी खींचतान के मामले सामने आये हैं। कहीं, संभावित दावेदार को लेकर विरोध हो रहा है तो कहीं बाहरी नेताओं को अधिक महत्व मिलने से पार्टी के मूल कार्यकर्ता नाराज हो गये हैं।

कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि टिकट वितरण के बाद चुनावी संभावनाओं पर असर से बचने के लिये तथा नेताओं का दूसरे दल में पलायन रोकने की चिंता कांग्रेस को सता रही है। इसलिए अभी से डैमेज कंट्रोल की तैयारी की जा रही है। पार्टी का मानन है कि दिग्विजय सिंह ही एक मात्र ऐसे नेता हैं जिनका पूरे प्रदेश में नेटवर्क है और कार्यकर्ताओं को वे नाम पते के साथ भी पहचानते हैं, इसलिए नाराज या घर बैठे नेताओं को मनाने समझाने का दायित्व उनके पास ही रहेगा।

वैसे यह काम सिंह ने 2013 के चुनाव में मतदान के ठीक पहले भी किया था और इसके बाद 2018 में 0विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने संगत में पंगत कार्यक्रम करके कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने का काम किया था। यह प्रयोग काफी हद तक सफल भी रहा था। कांग्रेस यह अच्छी तरह से जानती है कि सत्ता में वापसी के लिए कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच समन्वय से ही संभावना बनेगी।

उल्लेखनीय है कि गत चुनाव में संगत में पंगत के दौरान दिग्विजय के साथ पूरे समय रामेश्वर नीखरा साथ रहे थे। हाल में कमजोर सीटों पर सिंह के दौरे में भी नीखरा साथ रहे थे। बताया जाता है कि कांग्रेस अपनी जन आक्रोश यात्रा पूरी होने के बाद सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव, अजय सिंह सहित अन्य नेता को भी समन्वय बनाने की जिम्मेदारी देगी। यह अपने प्रभाव क्षेत्र मिं सक्रिय होंगे।

टिकट बांटने की जल्दी से बच रही कांग्रेस

जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अभी चुनाव के ऐलान की प्रतीक्षा में है, वह अभी से टिकट बांटने के फेर में नहीं फंसना चाहती। हालांकि उसका दावा तो अगस्त में चुनाव के लिये टिकट बांटने का था मगर कल कमलनाथ ने भी साफ कहा है कि स्थानीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नेताओं का चयन किया जा रहा है।

उधर भाजपा से जिन नेताओं को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई जा रही है, उनको लेकर स्थानीय इकाइयों से सहमति लेने की अनिवार्य व्यवस्था बनाई है ताकि विरोध होने की सूरत में उनकी भी जिम्मेदारी निर्धारित की जा सके। कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सह प्रभारी भी जिलों में नेताओं के बीच समन्वय का काम देखेंगे। वे पहले ही साफ कर चुके हैं कि सरकार बनने पर कार्यकर्ताओं को पूछपरख होगा। उन्हें सत्ता में स्थान भी मिलेगा और इसकी जवाबदारी संगठन की होगी।

नाराज कार्यकर्ताओं की सूची बनाकर संवाद

एक-एक जिले में नाराज कार्यकर्ताओं की सूची बनाकर उनसे संवाद किया गया था। वर्तमान में दिग्विजय सिंह और रामेश्वर नीखरा उन 66 सीटों के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुके हैं, जहां पार्टी को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। नीखरा को संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। वे भी दिग्विजय सिंह के साथ रहेंगे।