प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भारत जल सुरक्षा में अभूतपूर्ण काम कर रहा है और अभूतपूर्ण निवेश भी कर रहा है। जल संरक्षण के लिए राज्यों के प्रयास देश के सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि जियो मैपिंग और जियो सेंसिंग जैसी तकनीक जल संरक्षण के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कई राज्यों ने इसमें अच्छा काम किया है। और कई राज्य इस दिशा में आगे बढ रहे हैं। जल संरक्षण के लिए केंद्र ने अटल भू जल संरक्षण योजना की शुरुआत की है। मोदी आज भोपाल में आयोजित जलसंसाधन मंत्रियों के सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

इस मौके पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मप्र मे जल्द ही जलनीति बनाई जाएगी। जल समस्याओं को दूर करने के लिए राज्यों के सभी जल मंत्री भोपाल में दो दिन मंथन करके रोडमैप तैयार करेंगे। इसमें वाटर विजन एट 2047 पर संवाद होगा। पानी बचाने से जुड़े हर पहलू पर चर्चा होगी। साथ ही जिन क्षेत्रों में पानी की खपत अधिक है उसे कम करने और संतुलन बैठाने के विषय पर भी चर्चा हो रही है। सम्मेलन में केंद्रीय जलशति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्यमंत्री प्रह्लाद पटेल भी शामिल हैं।

जितने प्रयास होंगे, उतना प्रभाव

प्रधानमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के लिए जन भागीदारी की सोच को जनता के मन में जगाना है। हम इस दिशा में जितना ज्यादा प्रयास करेंगे उतना ही अधिक प्रभाव पैदा होगा। देश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बना रहा है और अब तक 25,000 अमृत सरोवर बन भी चुके हैं।

हितधारकों से भी इनपुट

दो दिवसीय इस सम्मेलन में राज्यों के हितधारकों से विजन एट 2047 के लिए इनपुट लिया जा रहा है। परंपरागत जल प्रबंधन की योजनाओं पर निचले स्तर पर काम करने के लिए लोगों को जागरूक करने की दिशा में कदम उठाने पर चर्चा की जा रही है। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ट अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

मोदी भविष्य की आवश्यकताओं पर काम करते हैं: शिवराज

इस कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में सीएम शिवराज ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में हमें विजन नेतृत्व मिला है। वे भविष्य की आवश्यकताओं पर काम करते हैं। हमें पता ही नहीं था कि देश में कितनी जल संरचनाएं हैं। मध्यप्रदेश में 2003 तक सिंचाई की क्षमता साढे सात लाख हेक्टेयर थी। अब 45 लाख हेक्टेयर हो गई है। अब मप्र अपनी जल नीति जल्दी लेकर आने वाला है। वाटर विजन के इस कार्यक्रम में जो मंथन होगा, उसके निष्कर्ष को नीति में शामिल किया जाएगा।