सियासत में होने वाली छोटी से छोटी हलचल भी चुनाव की तरफ ही इशारा करती है। ऐसे में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा चुनावों से तो दूरी बनाये हुए है लेकिन विपक्ष इसे चुनावी एजेंडे से जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। 

23 नवंबर को सुबह सूर्य की किरणों के साथ ही भारत जोड़ो यात्रा बुरहानपुर के बोदरली गांव से मध्यप्रदेश में एंटर हुई। यात्रा धीरे-धीरे आगे बढ़ती जा रही है और एमपी कांग्रेस के लगभग सभी दिग्गज नेता राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। बड़ी संख्या में जनता का आशीर्वाद भी यात्रा को मिल रहा है। 

एमपी में करीब 360 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए यात्रा छह जिलों बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, इंदौर, उज्जैन और आगर-मालवा के कई विधानसभा क्षेत्रों से होते हुए 5 दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश करेंगी।

मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जेपी अग्रवाल ने गुरुवार को ही मीडिया से चर्चा में दोहराया है कि यात्रा का उद्देश्य राजनीतिक नहीं है लेकिन इतना भी तय है कि अगर राजनीतिक नतीजे पक्ष में नहीं आते तो भी यात्रा के उपयोगिता पर सवाल उठाये जाएंगे। 

कांग्रेस की इस बात को माना जा सकता है कि यात्रा का चुनाव से लेना देना नहीं है क्योंकि यात्रा जिन राज्यों से गुजर कर आ चुकी है उनमें से केवल कर्नाटक में ही चुनावी सरगर्मियां दिखाई दे रही हैं। मध्यप्रदेश में अगले साल चुनाव हैं। ऐसे में यात्रा का तात्कालिक असर भले ही दिखाई दे लेकिन चुनाव तक यात्रा से मिले मूमेंटम को बरकरार रखना भी आसान नहीं होगा।

एमपी विधानसभा चुनाव 2023 से करीब 13 महीने पहले निकल रहीं इस यात्रा का फायदा कांग्रेस को चुनाव के समय मिल पता हैं या नहीं इस पर सभी निगाहे जरूर टिकी रहेगी। फिलहाल यात्रा के मार्ग पर नज़र डालें तो कांग्रेस का फोकस रास्ते में आने वाली उन 16 विधानसभा सीटों पर नज़र आता है जहाँ लंबे समय से बीजेपी का कब्ज़ा है। साथ ही कांग्रेस अपने परंपरागत कहे जाने वाले आदिवासी वोट को भी भाजपा की सेंधमारी से बचाने के जतन में है।

बता दें कि 2018 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने जीता था कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे हालांकि उनकी सरकार दो साल भी नहीं चल पाई थी क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया 20 से अधिक विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए थे। इसके बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनी और शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बने।

कांग्रेस में भी सत्ता गंवाने की टीस बरकरार है। यही कारण है कि भारत जोड़ो को गैर राजनीतिक कहने के बाद भी एमपी में एंट्री के साथ ही राहुल गांधी ने उन नेताओं पर हमला बोला था जिनके दलबदल से कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। राहुल ने कहा कि हमने विधानसभा चुनाव जीता था। हमारी सरकार बनी थी। बीजेपी ने करोड़ों रुपए देकर 20 से अधिक भ्रष्ट विधायकों को खरीद लिया और सरकार बना ली। 

अब राहुल के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ भी इस कसक को अगले साल विधानसभा चुनाव में जीत कर भुलाना चाहते हैं। कमलनाथ भी नई दिल्ली के मोह से दूर मध्यप्रदेश में केवल इसी टारगेट के साथ सक्रिय हैं कि अगले साल चुनावी जीत दर्ज कर वे दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे। देखना यह है कि भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस और कमलनाथ के इस सपने को पूरा करने का माध्यम बन पाती है या नहीं?