भोपाल: प्रदेश में अब तक वनमंडलों में एकाध हैमर गायब होने की घटनायें होती थीं परन्तु देवास वनमंडल में नौ हैमर गायब हो गये हैं। उल्लेखनीय है कि हैमर का उपयोग लकडिय़ों में मार्किंग एवं ड्रेसिंग कार्य करने के लिये होता है तथा हैमर लगी लकड़ी का ही विक्रय किया जा सकता है। अब वहां के डीएफओ पीएन मिश्रा ने इन गायब हैमर के निपटारे के लिये एकसाथ कार्यवाही कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवास वनमंडल के पानीगांव परिक्षेत्र में 11 फरवरी 2014 को दो हैमर जारी किये गये थे तथा कार्य पूर्ण होने के बाद ये हैमर कार्यालय में जमा कराये जाने थे। रेंजर ने छह साल बाद 22 नवम्बर 2020 को सूचना दी कि ये हैमर वनरक्षक इंदर सिंह रावत को दिये गये थे जिससे गुम हो गये हैं। इस पर अब उक्त वनरक्षक के वेतन से 1600 रुपये की वसूली के आदेश दिये गये हैं तथा गुम हैमर पलिखित कर दिये गये हैं।
इसी प्रकार, 7 मार्च 2022 को देवास परिक्षत्र के रेंजर को हैमर प्रदान किया गया जिसे कार्य पूर्ण होने के बाद जमा नहीं कराया गया। इस पर अब तत्कालीन रेंजर एवं वर्तमान उप वनमंडल अधिकारी इंदौर एके श्रीवास्तव के वेतन से 800 रुपये की वसूली के आदेश दिये गये हैं। वन परिक्षेत्र कन्नौद के रेंजर को 29 नवम्बर 2008 को हैमर दिया गया था जो जमा न होकर गुमना बताया गया।
इस पर भी कन्नौद परिक्षेत्र के तत्कालीन अधिकारी एवं वर्तमान उप वनमंडल अधिकारी इंदौर एके श्रीवास्तव के वेतन से 800 रुपये की वसूली के आदेश दिये गये हैं। बागली परिक्षेत्र के रेंजर को 1 दिसम्बर 2008 को हैमर प्रदान किया गया था जिसे वनरक्षक रघुवीर सिंह मौर्य ने जमा नहीं किया और 20 अगस्त 2013 को उसका निधन हो गया जिस पर प्रकरण बिना वसूली के समाप्त कर दिया गया। वन परिक्षेत्र कन्नौद के रेंजर को 3 नवम्बर 2007 को हैमर प्रदाय किया गया जिसके जमा नहीं होने पर रेंजर डीके मराठा के वेतन से 800 रुपये की वसूली की जायेगी।
एक ही वनरक्षक से गुमे तीन हैमर:
देवास वनमंडल में एक ही वनरक्षक से तीन हैमर गुमने की प्रकरण भी आया है। वन परिक्षेत्र पानीगांव के रेंजर से 5 जुलाई 2013 को, वन परिक्षेत्र पानीगांव के रेंजर को 5 जुलाई 2013 को तथा वन परिक्षेत्र पानीगांव के रेेंजर को 4 मार्च 2014 को हैमर दिया गया था तथा ये तीनों हैमर वनरक्षक विनोद कुमार सिंह को दिये गये थे जिसने कार्य पूर्ण होने के बाद जमा नहीं कराये। इससे अब इन तीनों हैमर की कीमत 2400 रुपये की वसूली वनरक्षक विनोद कुमार सिंह के वेतन से करने के आदेश दिये गये।
वन परिक्षेत्र बागली की बीट पलासी को 30 मार्च 1976 में हैमर आवंटित किया गया था परन्तु वह अब घिस गया है, जिसे अपलिखित कर दिया गया है।