भोपाल: वन मंत्री विजय शाह ने स्थानीय लोगों को रोजगार दिलाने और वन्यजीवों एवं पक्षियों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने की मंशा से जंगलों में 50% फलदार पौधे के रोपण करने का आदेश जारी किया है. शाह के आदेश के बाद वन विभाग को सागौन, जंगलों में फलदार पौधारोपण की सुरक्षा और रखरखाव के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान करना पड़ेगा.
प्रदेश के जंगलों में इमारती वृक्ष सागौन, करंज, बांस, आंवला और शिस्सु का प्लांटेशन किया जाता है. इनकी सुरक्षा के लिए फॉरेस्ट अफसरों को खास मशक्कत नहीं करना पड़ती, क्योंकि पशु इन्हें नहीं खाते हैं. जबकि फलदार पौधों के रोपण के बाद की उनकी सुरक्षा और रखरखाव मैदानी अमले के लिए एक चुनौतीपूर्ण काम होगा.
वन मंत्री विजय शाह का कहना है कि वनों में अब ऐसे पौधों को लगाया जाए, जिससे वन्यजीवों को खाना भी मिले और जैव विविधता भी बनी रहे. उनका यह भी कहना है कि महुआ, आचार, हर्रा-बहेड़ा, हल्दू और पाडर के पौधे लगाने से स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा. इससे ग्रामीणों का जंगल से मुंह बढ़ेगा और वह स्वयं उनकी सुरक्षा करेंगे. फलदार पौधा रोपण से वन्यजीव और पक्षियों को पर्याप्त भोजन भी उपलब्ध हो सकेगा.
पूर्व वन बल प्रमुख के आदेश का नहीं हुआ पालन-
सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीसी दुबे जब अनुसंधान एवं विस्तार शाखा के प्रभारी थे तब तत्कालीन वन बल प्रमुख जेके मोहंती को प्रस्तावित किया था कि जंगलों में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण प्रजाति बीजा, तिनसा, हल्दु, महुआ, हर्रा- बहेड़ा, सोन पट्ठा, सीताफल, आचार, दमन और बेल के प्लांटेशन किए जाएं, दुबे के प्रस्ताव पर तत्कालीन वन बल प्रमुख मोदी ने आदेश जारी किया कि 30% पौधों का रोपण संकटापन्न प्रजाति के पौधे लगाए जाएं. मैदानी अफसरों ने विभाग के मुखिया के आदेश को धुएं में उड़ा दिया था. चुनावी वर्ष में वन मंत्री विजय शाह की पहल कितनी रंग लाएगी, यह अफसरों पर निर्भर है.