भोपाल में अब वाल्मी के अंदर बाघों का मूवमेंट बढ़ा है। बीते दो दिनों से वाल्मी परिसर में बाघों के दिखाई देने की खबर आ रही है, जिसे वन विभाग तो नहीं स्वीकार रहा है लेकिन अंदर काम करने वाले कुछ चौकीदारों ने दावा किया है कि उन्होंने बाघों को स्वयं देखा हैं हालांकि एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसे वाल्मी का बताया जा रहा है लेकिन वह वीडियों वाल्मी का नहीं है, इस बात की पुष्टि वन विभाग ने कर दी है। वन विभाग के अधिकारी पहले से यह मान रहे हैं कि वाल्मी के अंदर बाघ है और वे अपने ही क्षेत्रों में घूम रहे हैं। इसमें परेशान होने की जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि महीने में एक से दो बार कुछ लोग स्थानीय सोशल मीडिया ग्रुपों पर बाघों के वीडियो वायरल कर देते हैं और उसे भोपाल से होना बताते हैं, जो कि बाद में सच नहीं निकलते हैं। बीते दो दिनों से यही हो रहा है। एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, इसे वाल्मी का बाघ बताया जा रहा है जो कि सच नहीं है। वाल्मी में बाघों का मूवमेंट शुरू से रहा है। इनमें से कुछ बाघ चौकीदारों को दिखाई भी देते हैं।

वाल्मी में चौकीदारी का काम करने वालों ने दावा किया है कि उन्होंने बीते दो दिनों बाघ को देखा है, जिसके बाद वाल्मी प्रबंधन ने सभी को सतर्क रहने की सलाह दी है। बीते दिनों एक बाघ का मूवमेंट मैनिट परिसर व आसपास के क्षेत्रों में रहा था। जिसे पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने पड़े थे। वह एक पिंजरे में फंस गया था, जिसके बाद उसे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया है।

उल्लेखनीय है कि भोपाल के कलियासोत, मेंडोरा, बुल मदर फार्म, केरवा चौकी, केरवा पहाड़ी मौत का कुआं क्षेत्रों में बाघों की मौजूदगी है। पूर्व में एक बाघ तो शाहपुरा पहाड़ी से होता हुआ आकाशगंगा कॉलोनी तक दाखिल हो गया था। तेंदुए भी भोपाल के आसपास दिखाई देते रहे हैं। 

सुधारी गई मैनिट की टूटी हुई दीवार

इसके पूर्व पिछली बार बाघ का मूवमेंट मैनिट परिसर में भी देखने को मिला था। यहां बाघ करीब 15 दिनों तक रहा था। इस दौरान बाघ ने परिसर में बंधे हुए कई पशुओं पर हमला भी किया था। यहां बाघ की एंट्री मैनिट की टूटी हुई दीवार से हुई थी। बाद में वन विभाग की आपत्ति के बाद इस दीवार को सुधरवा भी लिया गया था। इसके पूर्व फरवरी 2022 में राजा भोज यूनिवर्सिटी में भी बाघ को देखा गया था। भोपाल के कलियासोत, केरवा, समरधा और भानपुर में भी बाघों का मूवमेंट देखने को मिला है।