मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी को भंग करने का मामला नया बखेड़ा बन रहा है। हाइकमान ने प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना जायसवाल को भी पार्टी ने हटा दिया, लेकिन चार वरिष्ठ उपाध्यक्षों को बरकरार रखा गया है। संगठन की राष्ट्रीय महासचिव प्रदेश प्रभारी ओनिका मेहरोत्रा ने बताया किजल्द ही संगठन को लेकर निर्णय लिया जाएगा। महिला कांग्रेस पर निष्क्रियता और पद बांटने पर कई तरह की शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि अर्चना जायसवाल खुद को पद पर बना होने का दावा कर रही हैं।

24 घंटे बीतने के पहले ही विवाद प्रारंभ हो गया था। महामंत्री बनाई गई इंदौर की सोनिया अतुल शुक्ला ने यह कहते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था किमैं 15 साल पहले महामंत्री थी और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी संभाल रही हूँ, इसलिए महामंत्री पद के साथ न्याय नहीं कर पाऊंगी। उनके इस्तीफे के बाद अन्य जगह से भी विरोध के स्वर उठने लगे थे। इसे देखते डा. अर्चना जायसवाल ने प्रदेश कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की सूची को रोक दिया था। किसी भी पदाधकारी को नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए थे।

असंतोष से निपटने के लिए प्रदेश प्रभारी की सहमति से प्रदेश उपाध्यक्ष नीता शरद तिवारी, पुष्पा शर्मा और यास्मिन शेरानी की अनुशासन समिति बना दी थी। सभी पदाधकारियों से कहा गया था किकिसी को कोई भी आपत्ति हो तो समिति को लिखित में आवेदन कर सकती हैं। इस कवायद के बीच पिछले सप्ताह नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिए गए।

अब हाइकमान द्वारा सिर्फ चार उपाध्यक्षों को बरकरार रखने के बाद नयी बहस छिड़ गई है और नये प्रदेशाध्यक्ष के नामों को लेकर सुगबुगाहटें होने लगी हैं। उल्लेखनीय है किबीते दिनों नूरी खान ने भी नाराजगी जताई थी इसके बाद उन्हें महिला कांग्रेस में पद मिला था। ज्ञात हो किअर्चना जायसवाल पहले भी अध्यक्ष रह

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने 30 जनवरी को मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की घोषणा की थी। लेकिन इसके चुकी हैं।