भोपाल: वन भूमि में अतिक्रमण हो रहे हैं. कटाई और अवैध उत्खनन का सिलसिला जारी है. इन सबके बीच जंगल महकमे में पदस्थापना, प्रमोशन और पनिशमेंट के मामले में लेत-लाली हो रही है. रीवा, ग्वालियर, छिंदवाड़ा बालाघाट जैसे अति संवेदन सर्किल में सीसीएफ के पद महिनों से खाली है. पांच वनमंडल में डीएफओ पद खाली है. इन रिक्त पदों में आईएफएस अफसरों को अपनी पदस्थापना का इंतजार है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के दो महीना बीत जाने के बाद भी 1987 बैच के आईएफएस अफसर अजीत श्रीवास्तव का पीसीसीएफ के पद पर प्रमोशन नहीं मिल पाया है. यहीं नहीं, काली दूरई, नवीन गर्ग, गौरव चौधरी जैसे करीब एक दर्जन के लगभग अफसरों के खिलाफ करवाई भी साल भर से लंबित है.

मुख्यालय सतपुड़ा में एपीसीसीएफ के विकास, भू-अभिलेख, समन्वय, वित्त एवं बजट, शिकायत एवं सतर्कता और संयुक्त वन प्रबंधन शाखा के पद रिक्त पड़े हैं. जबकि एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल कैडर विरुद्ध उज्जैन सर्किल में पदेन वन संरक्षक के पद पर कार्य कर रहे हैं. अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की कमी के कारण वन बन प्रमुख आरके गुप्ता ने एक-एक आईएफएस अफसरों को कई शाखाओं का प्रभार दिया गया है. विभाग का विकास शाखा सबसे महत्वपूर्ण है.

इसका प्रभाव यूके सुबुद्धि को दिया गया है. वर्तमान में सुबुद्धि की पूर्णकालिक पदस्थापना सीईओ बांस मिशन के पद पर है. जबकि उनकी योग्यता को देखते हुए गुप्ता ने विकास और संयुक्त वन प्रबंधन का दायित्व भी दे रखा है. सुबुद्धि को महत्वपूर्ण शाखाओं का अतिरिक्त बाहर मिलने से उनके बिरादरी के अफसरों में नाराजगी भी है. शुक्रवार को आलोक दास के रिटायर होने के बाद एपीसीसीएफ उत्पादन का पद भी खाली हो गया है.

मैनेजमेंट कोटे से प्रभार में चल रहा है सर्किल-

विभाग के सर्किल रीवा, ग्वालियर, बालाघाट और पेंच नेशनल पार्क के डायरेक्टर के पद रिक्त हैं.ये सभी पद मैनेजमेंट कोटे के तहत प्रभार में चल रहे हैं. रीवा सर्किल का प्रभार राजेश राय और बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी एपीएस सेंगर को दी गई है. दोनों अधिकारियों ने अपनी वर्किंग प्लान कंप्लीट करके मुख्यालय को सौंप दी है. रीवा सर्किल में वर्किंग प्लान बनाने वाले वन संरक्षक राजेश राय को वन मंत्री शाह रीवा में ही पदस्थ करना चाहते है. राय शाह के गुडबुक में है. यह बात अलग है कि राय को रीवा में पदस्थ करने की चर्चा के साथ ही विरोध भी शुरू हो गया है.

स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा पूर्व वन मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने अपनी आपत्ति से वन मंत्री को भी अवगत करा दिया है. राय अब अपनी पदस्थापना की बांट जोह रहे हैं. ग्वालियर सर्किल का प्रभार भी पालपुर कूनो के सीसीएफ उत्तम शर्मा को दी गई है. 200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर बैठे उत्तम शर्मा श्योपुर से ग्वालियर सर्किल का काम देख रहे हैं. ग्वालियर सर्किल में अवैध उत्खनन का 600 से लेकर 700 करोड़ रुपए तक के अवैध कारोबार किया जाता है. 200 किलोमीटर दूर बैठे उत्तम शर्मा किस तरह लगाम लगा सकते हैं यह विचारणीय प्रश्न है?

5 वनमंडलों में डीएफओ के पद भी खाली-

एक हफ्ते पहले ही पन्ना उत्तर वनमंडल में एक टाइगर की शिकारी के फंदे में फंसने से मौत हो गई थी. इस घटना के बाद एसीएस जेएस कंसोटिया घटनास्थल पर भी पहुंचे थे. वहां उन्हें अधिकारियों ने बताया कि कई महीनों से डीएफओ और एसडीओ के पद का लिखते हैं और उन्हें भरने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है. अजीबोगरीब स्थिति यह है कि पन्ना में एसडीओ का प्रभाव छतर वन मंडल में पदस्थ एसडीओ को सौंपा गया है.

इस प्रभार से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी बनो पर वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं. इसके अलावा अशोकनगर, राजगढ़, पूर्व छिंदवाड़ा, पश्चिम मंडला, रतलाम और बड़वाह वन मंडल के पद भी खाली पड़े हुए हैं. इन सभी पदों को मैनेजमेंट और राजनीतिक रसूख के दम पर भरे जाने की कवायद चल रही है. यही वजह है कि सूचियां बन और बिगड़ भी रही है.

दक्षिण बालाघाट में पदस्थ गिरजेश वरकडे को बुरहानपुर, एए अंसारी डीएफओ अनूपपुर को नौरादेही सेंचुरी और डीएफओ सुधांशु यादव को नौरादेही सेंचुरी से रायसेन पदस्थ किए जाने का विचार-मंथन लंबे समय से चल रहा है किंतु निर्णय अभी भी नहीं हो पा रहा है. कमोबेश यही स्थिति हरदा उत्पादन डीएफओ सुशील प्रजापति की छिंदवाड़ा पश्चिम वन मंडल में पदस्थ किए जाने को लेकर है. वल्लभ भवन में पदस्थ छतरपुर के विवादित अफसर अनुराग कुमार आप मैदानी पोस्टिंग के लिए गणेश परिक्रमा कर रहे हैं.

मुख्यालय से मंत्रालय के बीच झूल रहा पनिशमेंट की फाइलें-

हॉर्टिकल्चर घोटाले में फंसे सीसीएफ काली दुर्रई जनवरी में रिटायर हो जाएंगे. इनके खिलाफ आज तक वन विभाग जांच कंप्लीट नहीं कर पाया. दिलचस्प पहलू यह है कि पीसीसीएफ सीके पाटिल को न्यायालय से 3 साल की सजा मिलने के बाद से अब दुर्रई की जांच अधर में पड़ गई. इसी प्रकार लोकायुक्त की बारंबार फटकार के बावजूद भी अजय यादव, गौरव चौधरी करीब एक दर्जन आईएफएस अधिकारी ऐसे हैं, जिनके खिलाफ दंडित करने की फाइल बड़े बाबू के बीच झूल रही है. 20 करोड़ के वनीकरण क्षतिपूर्ति घोटाले के लिए आरोपित नवीन गर्ग को दक्षिण सागर वन मंडल से हटाने मंत्री विजय शाह के आश्वासन के बाद भी आज तक आदेश जारी नहीं हो सका है.

जबकि 19 दिसंबर को मंत्रालय में पदस्थ उप सचिव अनुराग कुमार ने पीसीसीएफ कैंपा को पत्र लिखकर लौटती डाक से हटाने संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं. यह प्रस्ताव प्रशासन एक शाखा से मंत्रालय तक नहीं पहुंच पाया है. 12 दिन से अधिक बीत गए हैं. चैन लिंक खरीदी के गड़बड़झाला में उलझे एपी सिंह सेंगर, अनुराग कुमार, पुनीत सोनकर, नियम विरुद्ध तबादला करने के आरोप में उन्हें बृजेंद्र श्रीवास्तव के विरुद्ध भी कारवाही सुषुप्त अवस्था में है. प्रियंका चौधरी सहित आधा दर्जन एसडीओ के खिलाफ भी कार्यवाही नहीं हो रही है.