मप्र के नए मुख्य सचिव के तौर पर दिल्ली से अनुराग जैन की आमद की संभावना जितनी तेज हैं, उतनी ही तेजी से अब कुछ 'अप्रत्याशित' होने के आसार मंत्रालय की ऊपरी मंजिलों पर तैरने लगे हैं। मौजूदा मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस आठ दिन के अवकाश पर चले गये हैं। आमतौर मुख्य सचिव सेवाकाल के आखिरी दिनों में लंबे अवकाश पर नहीं जाते हैं। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि यह बैंस का 'नयी पारी' से पहले खुद को 'रिफ्रेश' करने का तरीका भी हो सकता है।
क्योंकि, अनुराग जैन अभी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर इंडस्ट्रीयल प्रमोशन पॉलिसी मंत्रालय में हैं, वे कुछ महत्वपूर्ण कामकाज संभाल रहे हैं तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के कुछ खास प्रोजेक्ट में भी शामिल हैं। अब दिल्ली से भोपाल आना उनकी भी 'इच्छा' पर निर्भर होगा। यह भी माना जाता है कि कई बार 'खांटी नौकरशाह' किसी चुनाव के ठीक पहले बड़े दायित्व को लेकर 'सतर्क' रहते हैं। मप्र में 11 महीने बाद चुनाव हैं।
माना जा रहा है कि ऐन वक्त यदि जैन का मप्र आना संभव नहीं हुआ या देरी हुई तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कुछ वक्त के लिये फिर पहले बैंस पर ही भरोसा करने के मूड में हैं। वैसे भी, जैन का सेवाकाल अगस्त 2025 तक है। गौरतलब है कि बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण को तीन महीने का सेवा विस्तार मिला था । यदि मप्र में परिस्थितियां 'मोड' लेती हैं तो बैंस के . सेवा विस्तार की दौडधूप हो सकती है, लेकिन एक सूत्र का कहना है कि यह 'फील्डिंग' पहले ही जमाई जा चुकी है!
अफसरों की उम्मीदें जवां, डार्क हॉर्स कौन
प्रशासनिक मुख्यालय वल्लभ-भवन की ऊपरी मंजिलों पर तैर रहे सन्नाटे को 'पढ़ने' की कोशिश कर रहे कई सीनियर आईएएस अफसरों की उम्मीदें जवान हैं। इस पद के लिये जैन से सीनियर वीरा राणा भी हैं, जिनका 15 महीने का सेवाकाल बाकी है। केंद्र में पदस्थ संजय बंदोपाध्याय का सेवाकाल 21 महीने, तो जैन के ही बैच(1989) के मोहम्मद सुलेमान के पास भी 20 महीने हैं। उनके बाद आशीष उपाध्याय (22महीने), विनोद कुमार(19 महीने) हैं। फिर इसी बैच के जेएन कंसोटिया के पास 33 महीने हैं। जबकि 1990 बैच के सरकार के पसंदीदा अफसर राजेश राजौरा के पास तो पूरे साढ़े चार साल व एसएन मिश्रा के पास 26 महीने बाकी हैं।
केंद्र भी रहा है उदारः केंद्र कई मौकों पर 'सर्विस एक्सटेंशन' उदारता से देता रहा है। मप्र में ही मुख्यसचिव रहे आर.परशुराम व अंटोनी डिसा इसका उदाहरण हैं। इसी तरह दिल्ली में गत वर्ष ही रिटायरमेंट से पहले रॉ सेक्रेटरी सामंत गोयल और आईबी प्रमुख अरविंद कुमार को एक्सटेंशन मिला। इससे पहले अनिल धस्माना और आईबी प्रमुख राजीव जैन को छह-छह माह का सेवा विस्तार दिया गया है। फिर आईपीएस राकेश अस्थाना को एक वर्ष एक्सटेंशन देकर दिल्ली पुलिस आयुक्त की कुर्सी पर बैठाया। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को एक साल का एक्सटेंशन मिला केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला भी एक साल का सेवा विस्तार लेने में सफल हुए।
हालांकि उस वक्त कैबिनेट सचिवालय से सेक्रेटरी सिक्योरिटी के पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद का कथन सामने आया था- नियमों के मुताबिक एक्सटेंशन नहीं दिया जाना चाहिए। देश में ऐसा कौन सा आपातकाल है कि जिसके चलते सरकार को ट्रांसफर पोस्टिंग करने का समय नहीं मिला। रिटायरमेंट पर बैठे किसी नौकरशाह को एक्सटेंशन देते हैं तो उसकी जगह आने का इंतजार कर रहे व्यक्ति के हित प्रभावित होते हैं। ऐसा नौकरशाह, सरकार की ओर से मुआवजे का हकदार है।