भोपाल: प्रदेश के तीन वनमंडलों में ग्रीन इण्डिया मिशन के तहत वृक्षारोपण के लिये वल्र्ड बैंक से मिले 60 करोड़ रुपयों के उपयोग की अब सेटेलाईट इमेजनरी से जांच होगी। इसके लिये वल्र्ड बैंक ही करीब दस लाख रुपये और उपलब्ध करायेगा।

उल्लेखनीय है कि वल्र्ड बैंक ने प्रदेश के तीन वनमंडलों यथा सीहोर, होशंगाबाद एवं उत्तर बैतूल के तीन हजार हैक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिये राज्य के वन विभाग को पायलट प्रोजेक्ट के तहत 60 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये हैं। वर्ष 2018 से यह काम चल रहा है तथा वर्ष 2023 में इसकी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाना है।

वन विभाग की ग्रीन इण्डिया मिशन शाखा ने इसके लिये इन तीनों वनमंडलों के बिगड़े वनों एवं ऐसे सघन वनों जिसके बीच में वृक्षा नहीं हैं, वहां पौध रोपण किया है तथा उसने इस काम को निर्धारित मापदण्ड के हिसाब से किया है। परन्तु वल्र्ड बैंक इस पौधरोपण की सेटेलाईट इमेजनरी से जांच करना चाहता है।

इसके लिये वन विभाग की ग्रीन इण्डिया मिशन शाखा ने हाई रिज्युलेशन सेटेलाईट इमेज की प्रोसेसिंग करने के लिये एक फर्म सप्तऋषि कन्स्लटेंसी सर्विस लिमिटेड नोयडा उप्र को शार्ट लिस्ट किया है तथा उससे तकनीकी एवं वित्तीय प्रस्ताव मांगे हैं। प्रस्ताव में आने वाली दरें उपयुक्त होने पर इस फर्म को यह कार्य दे दिया जायेगा।

सेटेलाईट इमेजनरी की प्रोसिंग करने के बाद यह फर्म अपनी रिपोर्ट देगी जिसे वन विभाग वल्र्ड बैंक को भजेगा। यदि वल्र्ड बैंक इस रिपोर्ट से संतुष्ट हुआ तो वह फिर प्रदेश के अन्य वनमंडलों में भी बिगड़े वनों के सुधार हेतु भारी भरकम राशि प्रदान करेगा।

इण्डक्शन देने पर लगाई रोक:

ग्रीन इण्डिया मिशन की राज्य इकाई ने जिन वन क्षेत्रों का वृक्षारोपण हेतु चयन किया वहां के रहवासियों को ईंधन के लिये वनों की लकड़ी काटने से रोकने के लिये इण्डक्शन (बिजली से चलने वाला चूल्हा) नि:शुल्क दे रही थी। चूंकि केंद्र सरकार अपनी उज्जवला योजना के तहत नि:शुल्क गैस एवं चूल्हा प्रदाय कर रही थी, इसलिये उसने इंडक्शन बांटने पर रोक लगा दी है।