भोपाल. बुरहानपुर में अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं. बुरहानपुर के घाघराला के जंगलों में 300 अतिक्रमणकारियों ने अंधाधुंध पेड़ों की कटाई शुरू कर दी. अतिक्रमणकारियों को भगाने जब 100 वन कर्मियों की टोली पहुंची तो उन पर तीर कमान से हमला कर दिया. दर्जन भर से अधिक वन कर्मी घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में उपचार के लिए भेजा गया.
अतिक्रमणकारियों का मुकाबला करने के लिए डीएफओ अनुपम शर्मा ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से आगरा किया किंतु मौके पर कोई नहीं पहुंचा. बुरहानपुर कलेक्टर ने तो डीएफओ के उस आग्रह को भी ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने अश्रु गोले दागने और फायरिंग के आदेश देने के लिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट भेजने के लिए था.
राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि वे अब चुनौती देकर जंगल में घुसने लगे हैं. 9 मार्च की रात को डीएफओ अनुपम शर्मा को सूचना मिलेगी गोफन और तीर कमान से लैस संगठित अतिक्रमणकारियों का दल घाघराला के जंगलों मेंअतिक्रमण करने जा रहा है. अगले दिन 10 मार्च को डीएफओ ने पुलिस अधीक्षक बुरहानपुर से फोन पर वन अमले को सहयोग के लिए पुलिस बल को अश्रु गोले सहित मौके पर भेजने का आग्रह किया.
बीएफ ओके निवेदन पर पुलिस अधीक्षक ने 14 पुलिसकर्मियों को 10 मार्च की शाम भेजा. इतने पुलिसकर्मी अतिक्रमणकारियों का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त नहीं थे. अतिक्रमणकारियों के आतंक को देखते हुए डीएफओ ने कलेक्टर से हवाई फायरिंग की अनुमति का भी निवेदन किया किंतु उसे ठुकरा दिया गया.
यानी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का अतिक्रमण कार्यों को भगाने के लिए सहयोग नहीं मिल पा रहा है. राजनीतिक नेताओं का संरक्षण और जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन का असहयोगात्मक रवैए से बेजा कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हो गए हैं. निहत्थे वन कर्मी अभी बुरहानपुर में पीट रहे हैं और शीर्ष पदों पर बैठे अफसर तमाशबीन बने हुए हैं.