MP Politics: मध्यप्रदेश की सियासत के केंद्र में इन दिनों दो घटनाएं काफी चर्चाओं में हैं. दोनों की घटनाएं सोशल मीडिया के ज़रिये ही सियासत की दहलीज चढ़ी हैं. जिन पर अब सियासी गलियारों में जमकर दांव पेंच जारी हैं. इन दांव पेंच को इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा है. कुल मिलाकर दलित और आदिवासियों के नाम पर सियासी रोटी सेकने की पूरी तैयारी की जा रही है.

पहली घटना जुलाई की 2 तारीख को शिवपुरी के वरखाड़ी गांव से वायरल हुई थी. यहां कुछ लोगों ने अनुज जाटव और संतोष केवट नामक 2 दलित युवकों को छेड़खानी करने के आरोप में पकड़ लिया था. ग्रामीणों ने मिलकर युवाओं के साथ पहले मारपीट की, फिर दोनों युवकों को चप्पलों की माला पहनाई.

इतना ही नहीं दोनों के मुंह में मल (मैला) तक भर दिया. उनके मुह और कपड़ों पर भी लगा दिया. इसके बाद दोनों युवकों का जुलूस निकालते हुए पुलिस को सौंप दिया. अब दोनों युवकों के साथ बरते गए अमानवीय व्यवहार और उनके साथ मारपीट करने वाले 7 आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है.

पुलिस ने वरखाड़ी गांव के रहने वाले अजमत खान, वकील खान, आरिफ खान, शाहिद खान, इस्लाम खान, रहीशा बानों, साइना बानों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. एक आरोपी वकील खान को छोड़कर सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्त्तार कर जेल भेज दिया हैं. फरार वकील खान की तलाश में पुलिस जुटी हुई है. हालांकि, दोनों पीड़ितों ने इन आरोपों से इंकार किया हैं.

शिवपुरी के बाद सीधी जिले में हुई ये घटना-

वहीं, दूसरी ख़बर सीधी जिले से हैं, जो मंगलवार 4 जून को वायरल हुई. यहां पर एक आदिवासी युवक पर बीजेपी कार्यकर्ता के पेशाब करने के वायरल वीडियो ने सियासत में तूफ़ान ला दिया था. फ़िलहाल, आरोपी को NSA के तहत पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया हैं.

अब इन दोनों ही घटनाओं पर सियासत भी चरम पर हैं. सीधी पेशाब कांड पर कांग्रेस बीजेपी को घेरने में लगी हुई है. लेकिन शिवपुरी की घटना पर कांग्रेस की चुप्पी कई सवाल खड़े करती हैं. सवाल ये कि क्या वहां पर आरोपियों का बीजेपी से ताल्लुक नहीं है. या फिर आरोपियों का धर्म आड़े आ गया. ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस के किसी भी नेता ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है.

बीजेपी अब कांग्रेस की चुप्पी पर निशाना साधते हुए सीधी की भड़ास शिवपुरी में निकाल रहीं है. शिवपुरी घटना के वक्त बीजेपी खेमा पूरी तरह से खामोश था और कांग्रेस ने भी चुप्पी साध रखी थी. हालांकि, सीधी कांड पर कांग्रेस ने बीजेपी को जमकर घेरा तो अब बीजेपी ने भी शिवपुरी की घटना को मुद्दा बनाकर NSA के तहत कार्रवाई करने की बात करते हुए कांग्रेस पर हमला बोलना शुरू कर दिया है.

इन घटनाओं से एक बात तो साफ़ तौर पर कह सकते हैं कि दोनों ही दल अपना वोट बैंक मजबूत करने में लगे हुए हैं. यहीं वजह है कि एक के पैर धुलवाए जा रहे हैं. तो वहीं, दूसरी जगह पीड़ित घटना के इतने दिन बाद तक आरोपियों के घर पर बुलडोज़र चलाने की मांग करता रहा.