भोपाल: राज्य सरकार ने अगले साल विधानसभा के आम चुनाव को दृष्टिगत रखते हुये तेन्दूपत्ता संग्राहकों को दो साडिय़ां, एक छाता और एक मिल्टन कंपनी की वाटर बॉटल देने की तैयारी प्रारंभ की है। वन मंत्री विजय शाह के निर्देश पर मप्र लघु वनोपज संघ इसका प्रस्ताव तैयार कर रहा है कि इसमें कितनाा बजट लगेगा। यदि बजट संघ के कोष से पूरा हो जायेगा तो संघ का संचालक मंडल इसकी स्वीकृति दे देगा अन्यथा अतिरिक्त बजट के लिये राज्य शासन के पास प्रस्ताव भेजा जायेगा।
उल्लेखनीय है कि पहले भी तेन्दूपत्ता संग्राहकों को प्लास्टिक की चप्पलें बांटी गईं थीं जिस पर विवाद हुआ था कि इससे कैंसर का खतरा हो सकता है। इसलिये इस बार चप्पलों को शामिल नहीं किया गया है। अगले साल मई तक दो साडिय़ां, एक छाता और एक मिल्टन कंपनी की वाटर बॉटल बांटने का लक्ष्य रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि लघु वनोपजों का संग्रहण एवं विक्रय दूरस्थ अंचलों में रहने वाले ग्रामीणों के लिये आजीविका का एक मुख्य साधन है। प्रदेश में लगभग 15 लाख परिवारों के 37 लाख सदस्य लघु वनोपज संग्रहण कार्य से जुड़े हैं, जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक सदस्य आदिवासी समाज के हैं।
इन लघु वनोपज संग्राहकों को बिचौलियों के शोषण से बचाने तथा उन्हें उनकी संग्रहित लघु वनोपज का उचित लाभ दिलाने के उदेश्य से प्रदेश में लघु वनोपज का संग्रहण एवं व्यापार सहकारिता के माध्यम से किया जाता है। इसके लिये सहकारिता का त्रिस्तरीय ढांचा बनाया गया है, जिसमें प्राथमिक स्तर पर संग्रहणकर्ताओं की सदस्यता से बनायी गयी 1066 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियां है, द्वितीय स्तर पर 60 जिला स्तरीय यूनियन तथा शीर्ष स्तर पर मप्र राज्य लघु वनोपज संघ कार्यरत है। प्रदेश में किसी भी लघु वनोपज के संग्रहण पर प्रतिबंध नहीं है।
ग्रामीणजन लघु वनोपज के संग्रहण हेतु स्वतंत्र है, सिर्फ तेन्दूपत्ता के व्यापार का ही संग्राहकों के हितों को ध्यान में रखकर लघु वनोपज संघ के माध्यम से संचालन किया जाता है, अन्य लघु वनोपज के संग्रहण के साथ-साथ व्यापार हेतु भी ग्रामीण जन स्वतंत्र है। संघ तेन्दूपत्ता संग्राहकों के बच्चों को शिक्षा में सहायता भी दे रहा है, जिसके लिये वर्ष 2011 में एकलव्य वनवासी शिक्षा विकास योजना प्रारंभ की गयी, जिसके तहत मेधावी छात्रों को सहायता राशि दी जाती है। अभी तक कुल 12223 छात्रों को राशि रूपये 12.47 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है।
वर्ष 2018 में तेन्दूपत्ता संग्राहकों हेतु मुख्यमंत्री तेन्दूपत्ता संग्राहक कल्याण सहायता योजना भी प्रारंभ की गयी, जिसके तहत अभी तक 1893 संग्राहकों को 8 करोड़ 45 लाख रुपये की बीमा सहायता प्रदान की गयी। इस वर्ष से तेन्दूपत्ता संग्राहकों को और अधिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से उन्हें संबल योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया है।