राजस्थान में सचिन पायलट ने एक बार फिर अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पायलट ने मंगलवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर दिन भर का अनशन किया। सचिन पायलट तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे के शासन में हुए घोटालों की जांच की मांग को लेकर मौजूदा गहलोत सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे थे।

पायलट वसुंधरा राजे के कार्यकाल में हुए घोटालों की जांच का मुद्दा उठा रहे हैं। पायलट ने वसुंधरा राजे पर भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाते हुए गहलोत का एक पुराना वीडियो चलाया और पूछा कि इन मामलों की जांच क्यों नहीं की गई। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास पिछली भाजपा सरकार के खिलाफ सबूत थे, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं की। भले ही पायलट वसुंधरा राजे के कार्यकाल में हुए घोटालों की जांच की मांग कर रहे हैं। लेकिन माना जा रहा है कि वे वसुंधरा राजे के बहाने अशोक गहलोत को निशाना बना रहे हैं।

अनशन खत्म करने के बाद पायलट ने कहा, वसुंधराजी की सरकार में हुए सभी घोटालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मैंने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। आमतौर पर मुख्यमंत्री को लिखे पत्रों का जवाब मिलता है, लेकिन इस मुद्दे पर मेरे पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। पायलट ने कहा, अगले कुछ महीनों में हम फिर लोगों से वोट मांगेंगे, चुनाव में अब सिर्फ 6-7 महीने बचे हैं। हम सार्वजनिक रूप से अपने साथ क्या लेकर जाएंगे? पायलट ने कहा, मैंने एक साल पहले इसका अनुरोध किया था।

वहीं कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट को अनशन न करने की चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके पायलट ने अनशन  किया। कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि ऐसी किसी भी गतिविधि को पार्टी विरोधी गतिविधि माना जाएगा।

राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। पायलट को पहले हमसे बात करनी चाहिए थी, मैं इस पर सीएम गहलोत से बात करता और फिर कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें अनशन करने का अधिकार है।' पायलट ने इस मुद्दे को पार्टी में उठाने की बजाय अनशन का सीधा रास्ता चुना, जो सही नहीं है।