राजधानी भोपाल में सब्जी से लेकर समोसा बेचने वाले कारोबारियों तक के लिए खाद्य लाइसेंस यानि कि छोटे स्तर के व्यापारियों या व्यापारिक संस्थानों के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। यही नहीं पान की गुमठी लगाने वालों के लिए भी लाइसेंस लेना जरूरी हो गया है। यदि कोई भी दुकानदार बिना पंजीयन के कारोबार करते हुए पाया गए तो दो लाख रुपए का जुर्माना और लाइसेंस नहीं होने पर पांच लाख तक का जुर्माना वसूला जाएगा।
जी हां ये ख़बर एकदम पक्की है, राजधानी भोपाल में अब दूध, किराना, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, फल-सब्जी, पानीपुरी, चाट, पोहा, समोसा, पान की गुमठी, टिफिन सेंटर, ट्रांसपोर्टर, राशन दुकानें, वेयर हाउस, केटर्स, शासकीय-अशासकीय संस्थाओं में संचालित कैंटीन एवं सभी खाद्य कारोबारियों को जो खाने-पीने की सामग्री का निर्माण, भंडारण, परिवहन और विक्रय करते हैं। उनके लिए पंजीयन कराना और लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
पंजीयन कराना और लाइसेंस सभी कारोबारियों के पास होना चाहिए। इसके लिए भोपाल शहर में 12 जगहों पर लाइसेंस और पंजीयन करवाने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। किसी दुकानदार के पास लाइसेंस न मिलने की सूरत में ठोस कार्रवाई करके प्रकरण को न्यायालय के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
ऐसे खाद्य कारोबारी जिनका वार्षिक टर्नओवर 12 लाख रुपये से अधिक है, ऐसे निर्माता जिनका उत्पादन प्रतिदिन एक मीट्रिक टन से अधिक है। आवश्यक दस्तावेज, पहचान पत्र, गुमाश्ता, किरायानामा, रजिस्ट्री, बिजली बिल शुल्क के आधार पर पात्रतानुसार दो से पांच हजार रुपये तक प्रति वर्ष पंजीयन करा सकते हैं।
शिविर में लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर में अभियान चलाया जाएगा और कारोबारियों के संस्थानों पर पहुंचकर पंजीयन एवं लाइसेंस की जांच की जाएगी। नहीं मिलने पर ठोस कार्रवाई किए जाने का भी प्रावधान है।
दरअसल भोपाल के गली मोहल्लों में खुली किराना, चाय-नाश्ता की दुकान चलाने वाले दुकानदार फूड लाइसेंस नहीं बनवाते हैं। इससे इन दुकानों की निगरानी करने में दिक्कत होती है। राजधानी में अब तक सिर्फ 15 हजार दुकानदारों ने ही फूड लाइसेंस लिया है, जबकि तीस हजार से अधिक छोटे-बड़े दुकानदार खाद्य सामग्री बेच रहे हैं।