सोशल मीडिया पर रोजाना कई वीडियोस वायरल होते रहते है। ऐसा ही एक वीडियो कृषि मंत्री कमल पटेल के गृह ज़िले हरदा से सामने आया है। बता दें कि वीडियो शनिवार शाम का बताया जा रहा है। इससे पहले भी सरकारी खरीदी में धांधली के कई वीडियोस ज़िले से वायरल हो चुके हैं।
वायरल वीडियो ज़िले में फ़ैल रही भ्रष्टाचार की बीमारी को उजागर कर रहा है। वीडियो में आप साफ तौर पर देख सकते है कि कैसे ख़राब मूंग सोसाइटी के अंदर तुला हुआ और वह भी सरकारी बोरियों में नजर आ रहा है। लेकिन अब आपके मन में एक सवाल तो गोते खा ही रहा होगा कि आख़िरकार बिना गुणवत्ता जाचें मूंग की खरीदी कैसे हो गई?
कृषि मंत्री @KamalPatelBJP के गृह जिले हरदा में हो रहा भ्रष्टाचार..! आरोप है कि किसानों के खातों पर व्यापारियों का ख़राब मूंग बेचा जा रहा है."सुल्तानपुर वेयरहाउस का वीडियो, रहटा कलां सोसायटी का मामला, अधिकारियों ने साधा मौन"@ChouhanShivraj @NarendraSaluja @INCMP @rishigargias pic.twitter.com/xQvCNhfV7Y
— Lokesh Rajput (@LokeshRajput01) September 11, 2022
अब आप इस वीडियो की सच्चाई को विस्तार से समझिये। दरअसल हाल ही में सुल्तानपुर वेयरहाउस से रहटा कलां सोसायटी का एक वीडियो वायरल हुआ। उस वीडियो में कुछ किसान विरोध करते नजर आ रहे है। किसान विरोध इसलिए कर रहे है क्योंकि उनका अच्छी क्वालिटी का मूंग होने के बाद भी मौके पर मौजूद कुछ अधिकारियों ने उसे रिजेक्ट कर दिया, तो वहीं उन्हीं किसानों के सामने पूरी तरह से ख़राब मूंग तुला हुआ वेयरहाउस के अंदर भरा था।
ज़िला कृषि विभाग पर उठे कई सवाल..!
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1. मौके से सभी सीनियर अधिकारी थे गायब?
2. बिना अधिकारी की अनुमति से कैसे हुई तुलाई?
3. किसान नहीं था मौके पर मौजूद, नाम भी नहीं आया सामने?@KamalPatelBJP@OfficeOfKNath @BJP4MP@minmpkrishi @collectorharda https://t.co/fEVYSOO0gY pic.twitter.com/YZ9gZNxApB
यह सब कुछ देख किसानों ने अपना विरोध जताना शुरू कर दिया। जिसके बाद आनन फानन में अधिकारियों ने पूरा खराब मूंग ट्रॉली में भर दिया, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ है और सवाल पूछने पर अधिकारियों ने यह कहते हुए इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया कि ‘मौके पर कोई भी सीनियर अधिकारी मौजूद नहीं था, जिसके चलते मजदूरों ने यह मूंग गलती से तोल दिया’।
इस मामले में चौकाने वाली बात यह है कि ख़राब मूंग किसका है यह किसी को भी पता नहीं है और न ही उस वाहन का कुछ अता पता है जिसके ज़रिये इस मूंग को सोसायटी तक लाया गया। अधिकारियों के पास भी इसकी कोई जानकारी नहीं है। हंगामा बढ़ता देख अधिकारियों ने तुला हुआ मूंग किसी ओर की ट्राली में भर दिया।
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अब इस मामले में कई सवाल खड़े हो रहें है। आख़िरकार बिना अधिकारी की अनुमति से कैसे मूंग तुला? तुलाई से पहले गुणवत्ता जांचने का नियम है, तो फिर ज़िम्मेदार अधिकारी ने इसका पालन क्यों नहीं किया? विरोध से पहले ही अधिकारियों ने क्यों इस पर एक्शन नहीं लिया? मौके से कई अधिकारी गायब क्यों थे? स्थानीय अधिकारियों से लेकर ज़िला कृषि विभाग तक ऐसे कई सवालों के घेरे में हैं।
मौके पर मौजूद कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि साँठ-गाँठ कर किसानों के खातों पर व्यापारियों का खराब मूंग बेचा जा रहा है। साथ ही किसानों ने भेदभाव का आरोप लगते हुए कहा कि अच्छे मूंग को रिजेक्ट किया जा है और खराब मूंग तुल रहा है।
हंगामे को बढ़ता देख स्थानीय अधिकारियों ने कार्रवाई के नाम पर पंचनामा बनाते हुए ख़राब मूंग को सोसायटी से बाहर कर दिया। फ़िलहाल ज़िला अधिकारियों ने इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया है।