भोपाल। राज्य सरकार ने पहली बार मेडिकल कालेजों के स्टुडेंन्ट्स के लिये अनिवार्य चिकित्सा सेवा के नियम बनाकर उन्हें लागू किया है। इन्हें मप्र आयुर्विज्ञान परिषद अनिवार्य चिकित्सा सेवा पंजीयन नियम नाम दिया गया है। ये नियम शासकीय स्वशासी एवं अन्य गवर्मेंट चिकित्सा महाविद्यालयों एवं निजी चिकित्सा कालेजों, दोनों में प्रवेश दिये गये समस्त विद्यार्थियों पर लागू होगा। अब तक अनिवार्य चिकित्सा सेवा के प्रावधान प्रवेश नियमों में शामिल रहते थे परन्तु अब इनके लिये एकजाई अलग से नियम बना दिये गये हैं।
उक्त नियमों के तहत अब सभी स्वशासी गवर्मेन्ट मेडिकल कालेजों में यूजी स्तर के विद्यार्थियों के अंतर्गत सामान्य वर्ग हेतु एक अनिवार्य चिकित्सा सेवा वर्ष तथा सेवा न देने पर बांड की राशि 10 लाख रुपये होगी जबकि आरक्षित वर्ग एससी/एसटी/ओबीसी हेतु भी एक वर्ष सेवा एवं 5 लाख रुपये बांड की राशि होगी। तकनीकी शिक्षा के अंतर्गत मुख्यमंत्री जनकल्याण शिक्षा प्रोत्साहन योजना एवं मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना और ओबीसी विभाग की पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत सभी वर्गों के लिये अनिवार्य सेवा 2 वर्ष एवं बाण्ड की राशि दस लाख रुपये होगी।
इसी प्रकार, गवर्मेंट मेडिकल कालेजों जोकि स्वशासी नहीं हैं, में यूजी स्तर के विद्यार्थियों हेतु सामान्य वर्ग के लिये अनिवार्य सेवा एक वर्ष एवं बाण्ड की राशि 10 लाख रुपये, आरक्षित वर्ग के अंतर्गत एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग हेतु 1 वर्ष एवं बाण्ड की राशि 5 लाख रुपये, तकनीकी शिक्षा के अंतर्गत मुख्यमंत्री जनकल्याण शिक्षा प्रोत्साहन योजना एवं मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना और ओबीसी विभाग की पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत सभी वर्गों के लिये अनिवार्य सेवा 5 वर्ष एवं बाण्ड की राशि 25 लाख रुपये होगी।
शासकीय स्वशासी मेडिकल कालेजों में पीजी कोर्स हेतु सभी वर्गों के लिये अनिवार्य सेवा एक वर्ष एवं बाण्ड की राशि 10 लाख रुपये, पीजी डिप्लोमा हेतु सभी वर्गों हेतु 1 वर्ष एवं बाण्ड की राशि 8 लाख रुपये होगी। निजी मेडिकल कालेजों में पीजी कोर्स हेतु सभी वर्गों हेतु अनिवार्य सेवा एक वर्ष एवं बाण्ड की राशि 10 लाख रुपये, यूजी कोर्स हेतु एक वर्ष एवं बाण्ड की राशि 8 लाख रुपये होगी।
नये नियमों के अनुसार, उक्त मेडिकल कालेजों के विद्यार्थियों को मप्र आयुर्विज्ञान परिषद अतिरिक्त पंजीयन प्रमाण-पत्र प्रदान करेगी तथा अनिवार्य चिकित्सा सेवा वह होगी जिसे करने के लिये स्वास्थ्य विभाग के परमर्श से चिकित्सा शिक्षा विभाग तय कर कह सकेगा। अनिवार्य चिकित्सा सेवा करने के बाद ही संबंधित उपाधि का पंजीयन स्थाई किया जायेगा। यह सब कार्य ऑनलाईन भी हो सकेगा