भोपाल: प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार का दिन कई घटनाओं को जन्म दे गया. शुक्रवार को ही आसंदी पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ के अविश्वास प्रस्ताव आया. संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने नियमावली की किताब विपक्ष की और उछाली और फिर अपने कृत्य को लेकर माफी भी मांगी.
लेकिन पूर्व मंत्री और कमलनाथ के किचन कैबिनेट के प्रमुख सज्जन वर्मा के कृत्य ने कांग्रेस की किरकिरी करा दी. सज्जन वर्मा ने आसंदी के सामने ही नियमावली किताब फाड़ कर फेंक दी. उनके इस कृत्य से उनकी सदन से सदस्यता भी जा सकती है.
प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को बजट सत्र पांचवें दिन की कार्यवाही के दौरान हंगामे के बीच विधानसभा की नियमावली की किताब का दो मर्तबा अपमान हुआ. पहली बार संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उसे फेंका तो दूसरी बार उनके खिलाफ निलंबन की कार्यवाही पर अड़े विपक्ष ने मांग को नजरअंदाज किए की वजह से उनके वरिष्ठ विधायक सज्जन वर्मा ने आसंदी के सामने खड़े होकर नियमावली किताब के टुकड़े कर दिए और फेंक दिए.
कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी को बजट सत्र की आगामी पूरी अवधि के लिए निलंबित किए जाने की कार्यवाही पर शुक्रवार को विपक्ष विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम पर हमलावर रहा. नेता-प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सूचना देकर आसंदी पर किसी और पीठासीन अधिकारी को बैठाने की मांग कर डाली. उनकी इस मांग पर हंगामा हुआ और विधानसभा अध्यक्ष गौतम असहज नजर आने लगे.
विपक्ष के हमलावर होने पर उद्वेलित हुए संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने विपक्ष की ओर नियमावली किताब विपक्ष की ओर उछाल दी. इस घटना से कांग्रेस को मुद्दा मिल गया और संसदीय कार्य मंत्री पर कार्रवाई करने के लिए आसंदी पर दबाव बनाया. आसंदी की ओर से नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ कोई व्यवस्था नहीं दिए जाने से नाराज विपक्षी विधायक गर्भ ग्रह में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे. इस बीच वरिष्ठ पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने विधानसभा अध्यक्ष के सम्मुख ही नियमावली की किताब फाड़कर फेंक दिया.
वर्मा ने सदन में हुई घटना स्वीकारोक्ति सदन के बाहर पत्रकारों के बीच की. इस घटना को लेकर विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने बताया कि अगर शिकायत होती है और सदन की कार्यवाही की फुटेज की जांच होगी. फिर निर्णय लिया जाएगा. गौतम ने यह भी बताया कि किताब पढ़ने की घटना से सज्जन वर्मा की सदन की सदस्यता भी समाप्त की जा सकती है. वैसे सज्जन वर्मा के कृत्य ने कांग्रेस विधायक दल को बैकफुट पर ला दिया. वहीं, सज्जन वर्मा के किताब फाड़ने के आचरण ने सत्तापक्ष को मौका दे दिया.
वर्मा-साधौ के खिलाफ रात को विशेषाधिकार की सूचना सौंपी-
संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ विशेषाधिकार सूचना शुक्रवार को सदन की कार्यवाही चलते हुए दोपहर में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने विधानसभा के प्रमुख सचिव को सौंपी थी. इसके बाद के घटनाक्रम में कांग्रेस विधायकों के आसंदी के सामने हंगामे के दौरान सज्जन वर्मा द्वारा नियमावली किताब को फाड़े की घटना हुई तो सत्तापक्ष को मौका मिल गया. भाजपा विधायकों की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें वर्मा और कांग्रेस की वरिष्ठ विधायक डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ के खिलाफ विशेषाधिकार हनन सूचना देने का फैसला लिया गया. रात को विशेषाधिकार हनन सूचना स्पीकर गौतम को सौंपी. विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि उन्हें अभी विशेषाधिकार हनन सूचना नहीं मिली है, रात को स्पीकर जी को दी गई है.
वर्मा के आचरण से कांग्रेस विधायक दल में मतभेद-
कमलनाथ के सबसे नजदीकी विधायक सज्जन वर्मा के अमर्यादित आचरण से पार्टी के कई विधायक दुखी हैं. उनके आचरण को भी गुटबाजी से जोड़ दिया गया है. नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह पहली बार संसदीय कार्य मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा के कृत्य को लेकर सत्ता पक्ष पर भारी पड़ रहे थे. अचानक सज्जन वर्मा के आचरण ने उन्हें बैक फुट पर ला दिया. कई युवा विधायकों का कहना यह है कि वर्मा के आचरण से सदन में कांग्रेस को शर्मसार होना पड़ा.
दूसरी बार के एक विधायक का कहना था कि वर्मा ने यह कृत्य जानबूझकर किया, ताकि नेता प्रतिपक्ष का नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लगे. यह बात अलग है कि वर्मा के आचरण ने कांग्रेस में सबसे अधिक संसदीय ज्ञान रखने वाले पूर्व केंद्रीय संसदीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की उस बयान को याद दिला दिया, जिसमें नाथ ने यह कहा था कि सदन में क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का बकवास सुनने के लिए बैठू. ऐसा सोच रखने वाले कमलनाथ के गुट से ही सज्जन वर्मा की पहचान है.