मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के आसपास इलाके बाघ के शिकारियों का गढ़ बनता जा रहा है। नए साल में शिकारियों ने बाघ के शिकार के लिए करंट फैलाया और उसे शिकार बनाया जिसमें एक हायना भी चपेट में आ गया। पन्ना टाइगर रिजर्व में एक महीने में दूसरे टाइगर की मौत की घटना से वन विभाग के अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। बीत गए 2022 में देश में सबसे अधिक टाइगर की मौत मध्य प्रदेश में हुई। 12 महीने में 34 से अधिक टाइगर की मौत हुई है।
पन्ना टाइगर रिजर्व में एकबार 2009 में टाइगर खत्म हो गए थे लेकिन टाइगर रिलोकेशन प्रोग्राम चलाकर वन विभाग ने यहां फिर टाइगर की आबादी को बढ़ाया। आज यहां लगभग चार दर्जन से ज्यादा टाइगर हैं। मगर पिछले कुछ समय से यहां शिकारियों ने फिर टाइगरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। किशनगढ़ रेंज में शिकारियों ने करंट फैलाकर फिर टाइगर को शिकार बनाया है जिसकी चपेट में एक हायना भी गया। टाइगर की करंट लगने से घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
एक महीने पहले फंदे से हुआ था शिकार
पन्ना टाइगर रिजर्व में एक महीने पहले शिकारियों ने टाइगर के शिकार के लिए फंदा लगाया था। टाइगर फंदे फंसा और फांसी पर झूल गया। उसके शव को कुछ दिन बाद फांसी पर लटका देखा गया। इस घटना से राज्य सरकार सकते में आ गई थी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आपात बैठक बुलाकर त्वरित एक्शन लेने के लिए निर्देश दिए थे। अभी फांसी पर लटकाकर टाइगर के शिकार की घटना को एक महीने भी नहीं बीता था और आज करंट फैलाकर टाइगर के शिकार की पन्ना टाइगर रिजर्व में दूसरी घटना ने वन विभाग की मुस्तैदी के दावों की पोल खोल दी है।
पन्ना में डीएफओ-एसडीओ के पद खाली
पन्ना- छतरपुर क्षेत्र में वन्य प्राणियों के शिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है। इनसे निपटने के लिए वन विभाग के अमले में पद खाली पड़े हैं। पन्ना में डीएफओ और एसडीओ के पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा रेंजर डिप्टी रेंजर और वन रक्षकों के पद की संख्या भी बहुत कम है। स्टाफ कमी के कारण ही शिकार करना आसान सा हो गया है। लटेरी घटना के बाद शिवपुरी, बुरहानपुर और गुना में पिट रहे वन कर्मचारियों की सुरक्षा सरकार द्वारा मुहैया नहीं कराने से उनका मनोबल गिरा हुआ है. गिरे हुए मनसे शिकारियों का सामना करने में वन कर्मचारी अक्षम महसूस कर रहे हैं