भोपाल: मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के 12 मंत्री डेंजर जोन में हैं। यानि इनके विधानसभा क्षेत्र में इनकी हालात खराब है। यानी इनका चुनाव जीतना मुश्किल है। खास बात यह है कि यह बात भाजपा के सर्वे में सामने आई है।

सूत्रों के अनुसार मप्र में विधानसभा चुनाव से एक साल पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण ने सत्ताधारी दल के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संगठन के नेताओं ने हाल ही में सर्वेक्षण रिपोर्ट पर 9 घंटे से अधिक समय तक मंथन किया।

भारतीय जनता पार्टी मंत्रियों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों में हो रही समस्याओं को लेकर चिंतित है। 30 मंत्रियों अपने-अपने क्षेत्रों में मुश्किल स्थिति में हैं। जहाँ तक उनके प्रदर्शन की बात है तो केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किए गए सर्वेक्षणों से पता चलता है कि वे मंत्री विफल रहे हैं। इनमें से अधिकांश मंत्री आरएसएस की विचारधारा से जुड़े हैं और ध्यान आकर्षित करने वाले माने जाते हैं। चूंकि वे लोगों से कटे हुए हैं, इसलिए चुनाव के दौरान उन्हें परेशानी हो सकती है।

सर्वे के मुताबिक जिन मंत्रियों की उनके क्षेत्र में स्थिति कमजोर है, उनमें से दो आदिवासी इलाकों से आते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए 14 मंत्रियों की स्थिति भी अपने-अपने क्षेत्र में कमजोर है। उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग इन मंत्रियों से नाराज हैं, क्योंकि उन्होंने मतदाताओं से दूरी बना ली है। वे लोगों के कल्याण के लिए काम नहीं कर पाए हैं। साथ ही अपने समर्थकों का अहंकार भी इन मंत्रियों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है।

जमीनी स्तर से जुड़े हैं ये नेता-

वहाँ बीजेपी के कई नेता ऐसे भी हैं जो लंबे समय से जमीनी स्तर से जुड़े हुए हैं। गोपाल भागव, भूपेंद्र सिंह, नरोत्तम मिश्रा, तुलसी सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर, ओमप्रकाश सकलेचा और विश्वास सारंग जैसे मंत्री अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मजबूती से जमे हुए हैं।

जिन मंत्रियों की उनके क्षेत्र में हालत खराब है उनमें इन मंत्रियों की हालत खराब-

बिसाहूलाल सिंह (अनूपपुर), मोना सिंह (मानपुर), महेंद्र सिंह सिसोदिया (बम्होरी), जगदीश देवड़ा (मल्हारगढ़), मोहन यादव (उज्जैन दक्षिण), उषा ठाकुर (मह), ब्रजेंद्र प्रताप सिंह (पन्ना), भरत सिंह कुशवाहा (ग्वालियर ग्रामीण), इंदर सिंह परमार (शुजालपुर), रामखेलावन पटेल (अमरपाटन), ओपीएस भदौरिया (मेहगांव), सुरेश धाकड़ (पोहरी) शामिल हैं।