माँ-बाप के बुढ़ापे का सहारा बनने वाले बेटे ने एक मोबाइल के चक्कर में रिश्तों को दरकिनार कर अपनों के साथ ही ख़ूनी खेल खेला. इस घटना को सुन हर कोई सहम गया क्योंकि माँ ने मोबाइल खरीदने के लिए बेटे को पैसे नहीं दिए तो उसने डंडे से इतना मारा कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.

हर किसी को चौका देने वाली यह घटना मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा ज़िले के परासिया बडकुही के दरबई गांव की है. दरअसल, इसी गांव में रहने वाली फूलवती बाई से उनके बेटे विनोद ने मोबाइल खरीदने के लिए 25 हजार रुपये मांगे थे, लेकिन जैसे-तैसे करके 15 हजार रुपये दिये तो बेटे ने गुस्से में रुपये फेंके और डंडे से मां को इतना मारा की उस दर्द को बयां कर पाना मुश्किल है.

इस घटना में फूलवती बाई को हाथ-पैर और शरीर में कई जगह गंभीर चोट आई. जिसके बाद उन्हें तुरंत 108 एम्बुलेंस से परासिया अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया. शरीर के दर्द से ज्यादा बेटे की घिनौनी हरकत से पीड़ित माता-पिता का अस्पताल में रो-रोकर बुरा हाल है.

रोजाना होते थे झगड़े-

परिवार वालों से बातचीत में पता चला कि बुजुर्ग फूलवती के दो बेटे और एक बेटी है. उनके पति रमेश यादव कोयला खदान से रिटायर हुए हैं और अब उन्हें पेंशन मिलती है. इन्हीं पैसों को लेकर घर में विवाद की स्थिति बनी रहती हैं. दोनों बेटे आये दिन पैसे की डिमांड करते रहते हैं. मना करने पर माँ-बाप दोनों को इसी तरह डंडे से मरते है. इससे परेशान होकर एक बार तो फूलवती बाई ने जहर भी खा लिया था.

कहते है न कि घटना से सबक लेना बहुत जरूरी होता है लेकिन यहां पर दोनों कपूत घटनाओं से सबक लेने के बजाय माँ-बाप को ही प्रताड़ित कर रहे थे. फ़िलहाल दोनों पति-पत्नी अस्पताल के एक कोने में बैठकर अपनी फूटी किस्मत पर रों रहे हैं.

बेटी बनी बुढ़ापे का सहारा-

हम सभी ने यहीं सुना है कि ‘बेटियां पराया धन होती हैं’. लेकिन इस घटना के दूसरे पहलू को सुनेंगे तो आप भी यही कहेंगे की ‘बेटी पराये घर जरूर जाती है पर माँ-बाप के लिए पराई नहीं होती’. क्योंकि फूलवती बाई और उनके पति को बेटे तो पैसों के लिए रुलाते रहें लेकिन जब उनकी बेटी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि इससे पहले भी मां को मारा गया था. इसलिए वे माता-पिता को अपने ससुराल में रखने लगी थी लेकिन सामाजिक दबाव के कारण वह ज्यादा दिन नहीं रुके.

बेटी ने आगे बताया कि जिस बेटे ने मारपीट की है वह कुछ दिन पहले ही जेल से छूटा है. दोनों ही बेटे पैसों के लिए माँ-बाप से मारपीट करते हैं. बुजुर्ग माँ-बाप को सहारा देने के लिए बेटी उनके पास मौजूद हैं. उनका हौसला न टूटे इसके लिए बेटी बुढ़ापे का सहारा बनाने के लिए तैयार है. इस घटना ने न सिर्फ़ रिश्तों के पीछे छिपे स्वार्थ को उजागर कर दिया बल्कि एक बार फिर से ये बात साबित की है कि लड़कियां भी अपने मजबूर माँ-बाप का मजबूत सहारा बन सकती हैं.