भोपाल : प्रदेश के शासकीय सेवकों जिनमें संविदा कर्मी, होमगार्ड, आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले, कार्यभारित मजदूर भी शामिल हैं, को अब सीजीएच यानि केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना की दरों के समान अनुबंधित अस्पतालों में परिवार के सदस्यों सहित उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके लिये राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत 64 साल पहले बने मप्र सिविल सेवा चिकित्सा परिचर्या नियम 1958 निरस्त कर नये नियम जारी कर दिये हैं।

नये नियमों में कहा गया है कि इसके प्रावधानों को राज्य की समितियों, निगमों, मंडलों आदि में भी अंगीकृत किया जा सकेगा। रिटायर्ड सेवकों, अंशकालिक शासकीय कर्मचारियों एवं अन्य अवैतनिक कर्मचारियों पर ये नियम लागू नहीं होंगे। आउटडोर रोगी उपचार में 2 हजार रुपये प्रति माह तक लेकिन एक वर्ष में 8 हजार रुपये तक की चिकित्सा प्रतिपूर्ति की स्वीकृति कार्यालय का नियंत्रणकत्र्ता अधिकारी स्वीकृत कर सकेगा।

8 हजार रुपये से अधिक किन्तु 20 हजार रुपये तक के बिलों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति की स्वीकृति जिला मेडिकल बोर्ड करेगा। जिन अस्पतालों में सीजीएच दरें उपलब्ध न हों, वहां इनडोर रोगी के 5 लाख रुपये से कम के दावे संभागीय मेडिकल बोर्ड स्वीकृत करेगा। इनडोर रोगी के 5 लाख रुपये से अधिक किन्तु 20 लाख रुपये तक के दावे राज्य स्तरीय मेडिकल स्वीकृत करेगा।