Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शिंदे गुट के बीच विवाद की सुनवाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच को सौंपने का फैसला किया है. आज पांच जजों की संविधान पीठ ने मामले की सुनवाई की है. अब जल्द ही संभव है कि सात जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर सकती है. यानी कहा जा सकता है कि इस मामले को अभी फ़िलहाल के लिए बड़ी बेंच को सौंप दिया गया है.
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कोर्ट के फैसले के बाद शिंदे जुट को लगा झटका
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राज्यपाल को वो नहीं करना चाहिए जो अधिकार संविधान ने उनको नहीं दिया है. अगर सरकार और स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा टालने की कोशिश करें तो राज्यपाल फैसला ले सकते हैं. लेकिन इस मामले में विधायकों ने राज्यपाल को जो चिट्ठी लिखी थी, उसमें यह नहीं कहा कि वह उद्धव सरकार हटाना चाहते हैं.
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उन्होंने सिर्फ अपनी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए है. कोर्ट ने कहा कि किसी पार्टी में असंतोष फ्लोर टेस्ट का आधार नहीं होना चाहिए. राज्यपाल को जो भी प्रस्ताव मिले थे, वह स्पष्ट नहीं थे. यह पता नहीं था कि असंतुष्ट विधायक नई पार्टी बना रहे हैं या कहीं विलय कर रहे हैं. साथ ही कोर्ट ने कहा कि हम उद्धव ठाकरे को दोबारा बहाल नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उन्होंने खुद ही इस्तीफ़ा दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि विधायकों की अयोग्यता पर हम फैसला नहीं लेंगे.
क्या था पूरा मामला?
2022 में महाराष्ट्र में शिंदे गुट के विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई. सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना के टूटने और महाराष्ट्र में सरकार बदलने की मांग वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया.
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, कृष्ण मुरारी, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हा की बेंच ने आज फैसला सुनाया. उल्लेखनीय है कि उद्धव गुट ने शिंदे के तख्तापलट और उनकी सरकार के गठन को अवैध करार दिया था.
इस राजनीतिक उठापटक के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक कई याचिकाएं दायर की गई. सदस्यता रद्द करने के आदेश के खिलाफ शिंदे गुट के 16 विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जबकि शिंदे को मुख्यमंत्री बनने के लिए आमंत्रित करने के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ उप-सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर बनाई सरकार
एकनाथ शिंदे शिवसेना के 16 विधायकों के साथ पहले पिछले साल जून में सूरत गए थे और बाद में गुवाहाटी में रुके थे. उद्धव ने शिंदे को वापस आकर बैठकर बात करने का प्रस्ताव भी दिया था. हालांकि शिंदे ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में नई सरकार बना ली.
फिर राज्यपाल ने शिंदे-भाजपा गठबंधन सरकार को मान्यता देते हुए शपथ दिलाई. ठाकरे गुट ने एकनाथ शिंदे और उनके 15 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो इसे संविधान पीठ को ट्रांसफर कर दिया गया. इस बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हेमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल हैं.