भोपाल: अब राज्य की वन भूमि में खनन प्रयोजन, जल विद्युत प्रोजेक्ट, पवन चक्की संयंत्र की स्थापना, पारेषण लाईनों एवं रेल्वे आदि विकासात्मक परियोजनाओं के लिये सर्वेक्षण एवं भूकंपीय सर्वेक्षण हो सकेंगे तथा इन्हें वनेत्तर प्रयोजन नहीं माने जायेंगे तथा इस कार्य में वनों में झाडिय़ों की सफाई और वृक्षों की शाखाओं की कांटछांट भी हो सकेगी। यह प्रावधान केंद्र सरकार द्वारा नये वन संरक्षण एवं संवर्धन एक्ट के तहत किया है। साथ ही अब खनन प्ररियोजनाओं के लिये वन भूमि में सर्वेक्षण, बोर होल की ड्रिलिंग तथा गढ्ढों को भी वनेत्तर प्रयोजन नहीं माना जायेगा तथा ऐसे सर्वेक्षणों में प्रति 10 वर्ग किमी में चार इंच व्यास के 25 बोर होल, भूकंपीय सर्वेक्षण के मामले में प्रति वर्ग किमी में 6.5 इंच व्यास के 80 शॉट होल जिसमें सौ से कम वृक्षों की कटाई भी हो सकेगी्र के लिये केंद्र सरकार की अनुमति की जरुरत नहीं होगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में दी छूट :

उक्त नये एक्ट के तहत वन भूमि में राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों के निर्माण के लिये भी छूट प्रदान की गई है। यह छूट देश की सीमा से 100 किमी हवाई दूरी के अंदर मिल सकेगी। नक्सल प्रभावित की वन भूमि में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना, औषधालय बनाने, विद्युत एवं दूरसंचार लाईनें डालने, पेयजल की लाईनें डालने, जल एवं वर्षा जल के संचयन की संरचनाओं, लघु सिंचाई नहर, ऊर्जा के गैर पारम्परिक स्रोतों, कौशल उन्नयन केंद्र बनाने, पावर सब स्टेशन बनाने, सार्वजनिक सडक़ें बनाने, मोबाईल टावर बनाने एवं पुलिस स्टेशन/चौकियां/ निगरानी टावर बनाने की भी छूट रहेगी। लेकिन राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों, टाईगर रिजर्व, टाईगर कोरिडोर में खनन हेतु कोई सर्वेक्षण नहीं हो सकेगा।