यूएसओएफ योजना वाली दूरसंचार कंपनियां मप्र की डाटा पहुंच नीति का लाभ नहीं ले सकेंगी


स्टोरी हाइलाइट्स

ऐसी कंपनियां जो यूनिवर्सल सर्विस आब्लिगेशन फण्ड-यूएसओएफ योजना के अंतर्गत काम कर रही हैं, उन्हें मप्र सरकार की वायर लाईन लाभ नहीं मिलेगा..!

भोपाल: प्रदेश में मोबाईल टावर लगाने वाली ऐसी कंपनियां जो केंद्र सरकार की सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि यानि यूनिवर्सल सर्विस आब्लिगेशन फण्ड-यूएसओएफ योजना के अंतर्गत काम कर रही हैं, उन्हें मप्र सरकार की वायर लाईन या वायरलस आधारित वाइस या डाटा पहुंच सेवायें उपलब्ध कराने के लिये अवसरंचना की स्थापना हेतु दिशा-निर्देश-2019 का लाभ नहीं मिलेगा।

दरअसल केंद्र सरकार ने यूएसओएफ की स्थापना उन दूरदराज ग्रामीण इलाकों एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिये बनाई है जहां निजी दूरसंचार कंपनियां अपने मोबाईल टावर नहीं लगाती हैं क्योंकि उन्हें वहां से अपर्याप्त राजस्व मिलता है। यूएसओएफ के अंतर्गत हर दूरसंचार कंपनी से उसके सकल राजस्व का 5 प्रतिशत इस फण्ड में जमा कराया जाता है तथा यह फण्ड इस समय एक लाख करोड़ रुपयों के आसपास है। इस फण्ड की राशि का इस्तेमाल केंद्र सरकार दूरदराज के ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनलेट एवं मोबाईल फोन की सेवायें उपलब्ध कराने के लिये करती है। यह काम भी टेण्डर के जरिये इन्हीं निजी दूरसंचार कंपनियों को दिया जाता है।

राज्य सरकार को तीन साल बाद अपने दिशा-निर्देश में इसलिये बदलाव करने पड़े हैं क्योंकि यूएसओएफ के अंतर्गत पहले से ही दूरसंचार कंपनियों को शासकीय भूमियों एवं सम्पत्तियों पर मोबाइल टावर लगाने की अनुमति मिली हुई है। इसलिये ऐसी यूएसओएफ वाली कंपनियों को राज्य की योजना से बाहर कर दिया गया है।

यह मामला जियो कंपनी का है जिसके प्रदेश में 100 मामले हैं। दिशा-निर्देशों में यह भी बदलाव किया गया है कि यदि टावर लगाने वाली भूमि वन भूमि है तो उसे इसकी अनुमति के लिये जिला कलेक्टर को ऑनलाईन आवेदन करना होगा तथा कलेक्टर वन विभाग से वन भूमि के उपयोग के अधिकार प्राप्त करेंगे। वनाधिकार कानून के तहत आने वाले वन ग्रामों के लिये भी निर्धारित शुल्क जमा कर एनओसी लेनी होगी।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि यूएसओएफ के अंतर्गत दूरसंचार कंपनियों को पहले से ही केंद्र सरकार की ओर से सुविधायें मिली हुई हैं, इसलिये इन्हें डाटा पहुंच सेवाओं की नीति का लाभ लेने के लिये अपात्र किया गया है। जियो कंपनी के प्रदेश में यूएसओएफ वाले सौ मामले हैं जिसके लिये यह बदलाव किया गया है।