MP News: मध्य प्रदेश की मोहन सरकार कहने को तो गले-गले तक कर्ज में डूबी हुई है। सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के लिए धनराशि उपलब्ध कराने सरकार लगातार कर्ज लेती जा रही है।

यानि कि सरकारी खजाना खाली है। सरकार के पास पैसा ना होने के बावजूद भी मंत्रियों के बंगले चमकाए जा रहे हैं।

जी हां शिवाजी नगर, चार इमली, 74 बंगला और श्यामला हिल्स में विशाल क्षेत्रों में बने सरकारी भवनों के रीनोवेशन पर उनके निर्माण की लागत से अधिक पैसा खर्च किया जा रहा है। यह खर्च आम अफसरों और कर्मचारियों के बंगलों पर नहीं, बल्कि मंत्रियों, नेताओं और आईएएस अफसरों को आवंटित बंगलों पर हो रहा है। कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के श्यामला हिल्स स्थित बी-3 आवास के लिए पीडब्ल्यूडी की ओर से 1 करोड़ 56 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई है।

इसमें से 99.94 लाख रुपये सिविल कार्य के लिए तथा 56.29 लाख रुपये इलेक्ट्रॉनिक कार्य के लिए दिए गए हैं। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के शिवाजी नगर स्थित सरकारी आवास सी-21 के लिए 91.19 लाख रुपये मिले, जबकि पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के चार कमरों वाले बी-10 आवास के लिए 30 लाख रुपये आबंटित किए गए हैं। वहीं राज्यमंत्री बागरी के आवास के सौंदर्यीकरण के लिए 80 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।

इस प्रकार, मंत्रियों के आवासों के नवीनीकरण के लिए 16 माह में 13.36 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। 

आम लोगों का कहना है कि भोपाल में एक अच्छा डुप्लेक्स 1 से 1.5 करोड़ रुपए में मिल जाता है। कई आईएएस अधिकारी भी इससे सहमत हैं। हाल ही में दिए गए संपत्ति विवरण में उन्होंने नोएडा जैसे स्थानों पर फ्लैटों और बंगलों की कीमत 1 करोड़ रुपये से 1.5 करोड़ रुपये के बीच बताई है। लोगों का कहना है कि आम लोग बंगले के नवीनीकरण पर होने वाले खर्च से भी कम लागत पर जमीन खरीदकर मकान बना रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर कर्ज के बोझ तले दबी राज्य सरकार खर्च कम करने के लिए संघर्ष कर रही है। साथ ही राज्य का कर्ज भी बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में पुराने मकानों के जीर्णोद्धार पर एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करना उचित नहीं है। यदि कोई सरकारी भवन रहने लायक नहीं है तो उसका पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए। इस बीच, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बारिश के दौरान कर्मचारियों के सरकारी आवासों में पानी घुस जाता है। उनके आवेदन लंबित हैं, जिस पर कोई ध्यान नहीं देता।