मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महिला व बाल विकास अमले के साथ 'खुलकर बात' की। उन्होंने आंगनबाड़ियों की हालत,कुपोषण की स्थिति और अन्य मामलों पर चिंता जताई और यहां तक कहा कि कुपोषण मप्र के माथे पर कलंक के समान हैं, हालांकि हमने कुपोषण को काफी कम किया है लेकिन अन्य राज्यों के मुकाबले हम पीछे हैं। ज्ञात हो कि हाल में कुछ बयानों व तुलनाओं को लेकर यह विभाग काफी चर्चा में रहा था और सियासी स्तर पर भी आलोचना झेली थीं।

शिवराज ने कहा कि हमारे पास इतनी योजनाएं हैं कि यदि उनका सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाए तो कोई भी बच्चा कुपोषित रह ही नहीं सकता। इसलिए जरूरत है इच्छाशक्ति की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग संकल्प ले कि अब एक साल में कोई भी बच्चा अंडरवेट नहीं रहेगा। राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में विभाग के मैदानी अमले को मार्गदर्शन देते हुए शिवराज ने कहा कि इस वक्त हालात उल्टे हैं, समाज बच्चों महिलाओं आंगनबाड़ियों की मदद करना चाहता है लेकिन सवाल लेने वाले का है। मैं पिछले दिनों जब सड़कों पर निकला तो लोग आंनगबाडियों के लिये राशि,चैक व सामान आदि देने उमड़ पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है 1000 बेटों पर 1000 बेटियां। वर्ष 2011-12 तक 1000 बेटों पर 912 बेटियां जन्म लेती थीं। लाड़ली लक्ष्मी योजना के कारण अब वह संख्या बढ़कर 956 तक हो गई है, और अब ओवरऑल लिंगानुपात है 1000 बेटों पर 976 बेटियां। विभाग की योजनाओं का भी लाभ देंगे और समाज से भी सहयोग लेंगे। समाज के पास देने को बहुत कुछ है।। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में एक दोहा पढ़ा और कहा कि 'मर जाऊं पर मांगू नहीं अपने तन के काज, परमार्थ के कारज में मोहे न आवे लाज।'

अमले का दर्द जानेंगे : मुख्यमंत्री ने कहा इस तरह के संवाद की हर तीन चार महीने में जरूरत है। इससे काफी समस्या हल हो सकेंगी। उन्होंने कहा वे अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं का दर्द भी समझना चाहते हैं जल्द ही उनसे भी बात करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने बेहतर काम करने वालों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव कार्य में लगाने पर रोक इधर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव समेत अन्य दूसरे कामों में लगाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रोक लगा दी है। अदालत ने अपने आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजा है जिससे कि वह संबंधित जिलाधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी कर सकें। मालूम हो कि प्रदेश में 1.89 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने यह फैसला मनीषा कनौजिया व एक अन्य की याचिका पर दिया। जिसमें कहा गया था कि इस तैनाती से क्षेत्र में बच्चों व माताओं के स्वास्थ्य की देखभाल की व्यवस्था प्रभावित होगी।