नवजातों के साथ हमीदिया के के दो महीने लगाने होंगे चक्कर

सुल्तानिया अस्पताल में नवजात बच्चों का इलाज नहीं होता है इन्हें हमीदिया में रेफर किया जाता है जबकि इन्हें जन्म देने वाली इनकी मां सुल्तानिया में ही भर्ती रहती है। सुल्तानिया से हमीदिया की दूरी काफी है जहां तक नवजातों को लाने-लेजाने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिसे देखते हुए सुल्तानिया अस्पताल के गायनिक विभाग को हमीदिया अस्पताल परिसर में बनकर तैयार नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाना है। पहले यह शिफ्टिंग फरवरी के अंत तक हो जानी थी लेकिन अब इसमें समय लग जाएगा। करीब दो हमीदिया अस्साल की जिस नई बिल्डिंग में यह विभाग शिफ्ट होना है वहां मार्च के अं तक नवजात शिशु चिकित्सा इकाई शुरू हो जाएगी। यह इकाई अभी कमला नेहरू गैस राहत विभाग की बिल्डिंग में संचालित हो रहा है। यहीं पर कुछ माह पूर्व आग लगी थी और कुछ नवजातों की मौत हो गई थी |

सोमवार से नई बिल्डिंग में नाक, कान, गला और आंखों के मरीजों को मिलेगा इलाज

हमीदिया अस्पताल में बनकर तैयार नई बिल्डिंग के ब्लाक-2 में सोमवार से नाक, कान, गला और आंख संबंधी बीमारियों के मरीजों को इलाज मिलने लगेगा। इन विभाग की ओपीडी शुरू हो जाएगी। अभी ये विभाग की ओपीडी हमीदिया अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में लगते हैं। यहीं पर दूसरे विभाग भी लगते हैं। एक्स-रे जैसी अन्य जांचे भी होती है। जिसकी वजह से बहुत भीड़ हो जाती है और मरीज और उनके परिजनों को दिक्कतें होती है। उन्हें बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं मिल पाती और उपर के माले तक आने जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा भी ठीक से नहीं मिलती है। लिफ्ट बार-बार खराब होती है। बहुत परेशान होना पड़ता है जबकि नेत्र रोग विभाग कमला नेहरू अस्पताल में संचालित होता है, यह भी नए ब्लाक-दो में लगने लगेगा। गांधी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के कुछ अधिकारियों ने बताया कि नई बिल्डिंग के लिए अभी पुराने बिस्तर और उपकरण ही उपयोग किए जाएंगे। नए खरीदने में समय लग रहा है |