लटेरी गोलीकांड में मृत चैन सिंह के खिलाफ अदालत में चल रहा था लकड़ी चोरी का ट्रायल


स्टोरी हाइलाइट्स

- मृतक के परिवार को 25 लाख बतौर मुआवजा देने पर उठने लगे सवाल

भोपाल. विदिशा वन मंडल के लटेरी में संगठित लकड़ी चोर गिरोह और वन अमले के बीच हुई मुठभेड़ में मृत चैन सिंह के खिलाफ वन विभाग ने लकड़ी चोरी के 10 मामले दर्ज हैं. ऐसे लकड़ी चोरी के आरोपी की मौत पर उनके परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया. जंगलों की सुरक्षा में अपनी जान का जोखिम लगाने वाले वन कर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो गया. एक डिप्टी रेंजर निर्मल की गिरफ्तारी हो गई. इस गिरफ्तारी के बाद से विभाग में असंतोष है.

दिलचस्प पहलू यह है कि मुख्यालय से मंत्रालय में बैठे फॉरेस्ट के शीर्ष अधिकारी विदिशा वन मंडल के दक्षिण लटेरी में 9 जनवरी 2021 में लकड़ी कटाई का आपराधिक प्रकरण दर्ज कर फरवरी को दौलत सिंह, बाल्मिक, वीर सिंह, रामदयाल और चैन सिंह पिता सरदार सिंह की गिरफ्तारी और उनके मोटरसाइकिल भी जप्त की थी. यही नहीं, विभाग ने उनके खिलाफ (आरटीएन-540/21) 5 अक्टूबर 2021 को न्यायालय में परिवाद भी प्रस्तुत किया है. इस मामले में कोर्ट में ट्रायल भी चल रहा है. वन विभाग के रिकॉर्ड में चैन सिंह और उसके भाई आदतन लकड़ी चोर अपराधी हैं.

मुठभेढ़ में चैन सिंह पिता सरदार सिंह की मौत के बाद जिला एवं पुलिस प्रशासन ने वन विभाग के अधिकारियों से वस्तुस्थिति जाने बिना ही वन कर्मियों के खिलाफ भादवि की धारा 302 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया. अपराधिक प्रकरण में पुलिस ने ऐसे डिप्टी रेंजर के नाम भी शामिल किया है जो कि मुठभेड़ में शामिल ही नहीं था. शनिवार को डिप्टी रेंजर निर्मल की गिरफ्तारी भी कर ली गई.

वन कर्मियों के खिलाफ पुलिसिया कार्यवाही और मृत लकड़ी चोरी के आरोपियों को 25 लाख और घायलों को पांच-पांच लाख मुआवजे के बाद से जंगल महकमे में असंतोष है. वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों का मनोबल भी गिरने लगा है. रेंजर एसोसिएशन और वन कर्मचारी संघ ने आंदोलन की धमकी तक दे डाली है.

एसोसिएशन पर उठते सवाल-

जंगल महकमे में आईएफएस एसोसिएशन, राज्य वन सेवा संघ, मप्र रेंजर एसोसिएशन और वन कर्मचारी संयुक्त संघ सक्रिय है. रेंजर्स और वन कर्मचारी संघ ने तो अपना विरोध दर्ज कराया है किंतु आईएफ एसोसिएशन और राज्य वन सेवा संघ किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में है. आईएफएस एसोसिएशन इतनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को लटेरी की वास्तविक घटना से अवगत करा सकें.

आईएफएस एसोसिएशन की स्थिति ठीक वैसी ही हो गई है, जैसे राजा-महाराजाओं के सेना में हाथी का हुआ करता था. यानी जब हाथी को हमले में एक तीर लगते वह अपनी जान बचाने के लिए अपने ही सैनिकों को रोंधते हुए मैदान से भाग जाते थे. कमोबेश  एसोसिएशन के पदाधिकारियों की भी स्थिति यही है. एसोसिएशन ने कभी भी जंगलों की सुरक्षा को लेकर सवाल नहीं खड़े किए. वह हमेशा तब सक्रिय हुई जब उनके पदाधिकारियों को प्रमोशन और प्राइम पोस्टिंग की जरूरत पड़ी.

किससे अपेक्षा करें और उसे बचाएगा?

लटेरी की घटना को लेकर आईएफएस एसोसिएशन ने व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी भावनाओं को व्यक्त कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली. ग्रुप में एपीसीसीएफ स्तर के एक सीनियर अधिकारी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कुछ यूं लिखा कि 'एक और बेचारा फॉरेस्टर.! करे तो क्या करें? क्या अपने लिए? वनों की सुरक्षा का लाभ तो संपूर्ण मानव जाति को मिलता है या उसे अकेले को? फिर सजा वही क्यों भुगते? सुरक्षा का इनाम एफआईआर और तबादला.

सुरक्षा करें तो दिक्कत ना करें तो दिक्कत. बड़ा धर्म संकट है. उसे नौकरी करना चाहिए ना कि ड्यूटी. बेवकूफ है जो निष्ठा से कर्तव्य पालन करता है... इससे अपेक्षा करें कौन उसे बचाएगा. क्या जरूरत है जोखिम डालने की हमारा तो यह हाल है कि गरीब की लुगाई सारे गांव की भौजाई.' इस पर प्रदीप वासुदेवा ने एपीसीसीएफ के वक्तव्य से सहमति जताई. उत्तम शर्मा  ने अंग्रेजी में लिखा कि ' एक सीरियस इशू है. इसे मजबूती से उठाना पड़ेगा. यदि अभी गिव अप कर दिया तो आगे चलकर बड़ा मुश्किल होगा. इसके लिए अच्छे वकील हायर करना होगा. प्रकाश वर्मा ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.