भोपाल: छत्तीसगढ़ राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने बिरसा मुण्डा के जन्मदिवस पर उन्हें याद करते हुए कहा कि वे एक महान आदिवासी नेता थे, उन्होंने शोषण और गुलामी के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित किया और उन्होंने देश और समाज को एक नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि वीर बिरसा मुण्डा ने जनजातीय समाज को सामाजिक कुरीतियों और आडम्बरों के खिलाफ भी जागृत किया।

राज्यपाल उईके मंगलवार को छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान, ‘जनजाति गौरव दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने बिरसा मुण्डा के जन्मदिवस को ‘जनजाति गौरव दिवस’ के रूप में मनाने के निर्णय को गौरवपूर्ण बताते हुए, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को सम्मान मिला है।

राज्यपाल ने कहा कि बिरसा मुण्डा ने हमारी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं को बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनके जैसे महानायकों से देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा एवं संवर्धन की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होने जनजातीय समाज को अशिक्षा तथा अन्य आडम्बरों से मुक्त होकर तथा अपनी मौलिक संस्कृति को बचाने एवं देश की प्रगति में अधिक से अधिक योगदान देने की आवश्यकता बताई।

धर्मांतरण रोकने का प्रयास हो..!

राज्यपाल उइके ने कहा कि आदिवासियों की मान्यताओं का सम्मान करते हुए, उनके प्राचीन गोंडी धर्म को भी मान्यता मिलनी चाहिए। इससे वे अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं को बेहतर तरीके से संरक्षित रख सकेंगे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि आदिवासियों के धर्मांतरण को भी रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए। इसके लिए आदिवासी समाज को स्वयं भी जागरूक होना होगा ताकि कोई भी बाहरी लोग उन्हें प्रभावित न कर सकें।

इस अवससर पर पूर्व मंत्री नानाभाऊ मोहोड़, पूर्व विधायक द्वय रमेश दूबे एवं नत्थन शाह तथा आदिवासी समाज एवं सम्मानीय जन उपस्थित थे।