जिंदगी में हर चीज़ जब पहली बार होती है, तो वह या तो जीवनभर की खुशी दे जाती है या फिर किसी-किसी के लिए ये एक कठिनाई से भरा समय भी हो सकता है। किशोरावस्था से युवावस्था की ओर कदम बढ़ाने के दौरान एक स्त्री के शरीर में कई बदलाव आते हैं। पहली बार पीरियड्स का शुरु होना भी इसी का एक हिस्सा है। पहली बार पीरियड्स आने पर युवती को थोड़ा डर भी लगता है, कि न जाने ये क्या हो गया है और क्यो हो गया है जैसे कई प्रश्न भी उसके दिमाग में कौंधने लगते हैं।
सही गाइडेंस और समझाइश मिलना इस दौरान सबसे ज़रूरी होता है। साथ ही ज़रूरी होता है परिवार का साथ और प्रेम। इसी तरह का एक उदाहरण पेश किया है उत्तराखंड के एक परिवार ने। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में एक परिवार ने केक काटकर अपनी बेटी के पहले मासिक धर्म का जश्न मनाया। यहां के काशीपुर शहर के निवासी जितेंद्र भट्ट ने अपनी बेटी की पहली माहवारी का जश्न मनाने के लिए अपने घर को सजाया और सबको इस जश्न का न्यौता भी दिया।
पेशे से संगीत शिक्षक जीतेन्द्र भट्ट ने समाज को यह संदेश देने के लिए ऐसा कदम उठाया कि "मासिक धर्म दुनिया का सबसे पवित्र धर्म है"। उनका कहना है, कि “जब मैं छोटा था तो मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मैंने देखा कि महिलाओं और लड़कियों को मासिक धर्म होने या इसके बारे में बात करने पर भी हेय दृष्टि से देखा जाता था। इस समय अगर कोई महिला किसी भी चीज को छू लेती है तो उसे अशुद्ध माना जाता है। इन सभी गलतफहमियों को दूर करने के लिए मैंने अपनी बेटी के पहले पीरियड्स को सेलिब्रेट करने के बारे में सोचा। ''यह अपवित्रता या छुआछूत की बीमारी नहीं बल्कि खुशी का दिन है।'''
स्थानीय लोग भी जितेंद्र की पहल से खुश हैं और उन्होंने कहा कि यह पहल रंग लाएगी और इस गलत धारणा से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी कि पीरियड्स के दौरान लड़कियां "अशुद्ध" हो जाती हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नवप्रीत कौर के मुताबिक, ''यह एक बहुत अच्छी पहल है, क्योंकि जिस तरह से लोग इसे छुआछूत मानते हैं वह बिल्कुल गलत है। ये कोई बीमारी नहीं है, ये छुआछूत नहीं है। पीरियड्स के दौरान हर दिन स्नान करें, हर दिन पूजा करें और हर दिन मंदिर जाएं।”