सवाल सिर्फ सुबह उठने का नहीं है बल्कि इस मीटिंग में जिस तरह से शिवराज सिंह चौहान तल्ख तेवर में नजर आते हैं उससे अधिकारी घबराते हैं| शिवराज सिंह चौहान के पास संबंधित जिले का पूरा डाटा होता है ऐसे में जिले के आला अधिकारियों को कई बार बगले झांकने को मजबूर होना पड़ता है|
मुख्यमंत्री ने आज लगातार तीसरे दिन सुबह 6.30 बजे जिलों में संचालित विकास गतिविधियों और कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने खंडवा और डिंडोरी जिलों के अफसरों को 'लाइन' पर लिया। इसमें संस्कृति मंत्री तथा खंडवा जिले की प्रभारी मंत्री उषा ठाकुर और डिंडोरी के प्रभारी मंत्री मोहन यादव व मंत्री विजय शाह वर्चुअली सम्मिलित हुए। सीएम ने खंडवा कलेक्टर अनूप कुमार सिंह, डिंडोरी कलेक्टर रत्नाकर झा और इन जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों से योजनाओं के हाल पूछे। उन्होंने कहा कि हर योजना का लाभ बिना विलंब और बिना भ्रष्टाचार के मिले। उन्होंने अवैध पशु परिवहन को गंभीरता से लेने व कलेक्टर को अपना इंटेलिजेंस का नेटवर्क विकसित करने को कहा तथा भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और अपराधियों तथा माफिया को पूर्णतः तरह ध्वस्त करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने खंडवा जिले की समीक्षा में निर्देश दिए कि कुपोषण को समाप्त करने को टास्क के रूप में लें, और हर 3 महीने में इसकी समीक्षा करें। आंगनबाड़ियों में पेयजल,
आज प्रात: खंडवा और डिंडोरी जिले में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं विकास कार्यों की प्रगति की निवास से वीसी के माध्यम से समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। https://t.co/psCKlOwYxd https://t.co/FJyFv8SY3w
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) May 21, 2022
बिजली की आपूर्ति पर ध्यान दें। अडॉप्ट एन आंगनवाड़ी योजना में आंगनबाडियों को गोद लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करें और गोद ली गई आंगनबाड़ियों को सतत मॉनिटरिंग करें। जिले को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के मामले में सीएम ने बधाई दी। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास में चयनित हितग्राहियों की सूची पंचायतस्तर पर प्रदर्शित की जाए| नाम जुड़वाने या किस्त जारी करने के लिए पैसे लेने की शिकायत बर्दाश्त नहीं की जाएगी, इस मौके पर बिजली आपूर्ति, बिजली बिल में गड़बड़ी संबंधी शिकायतों उनके निराकरणों पर भी चर्चा हुई। जावर और हरसूद में सीएम राइज स्कूल आरंभ करने का निर्णय और अमृत सरोवरों में से कुछ सरोवरों का कार्य 15 अगस्त तक पूर्ण करने कहा गया।
कई भावों को समेटा हुआ यह राग उनके स्वरों में खिन्नता का भाव प्रकट होता है। वे अफसरों को हिदायतें देते हैं- पैसे का लेनदेन बंद हो... कानून व्यवस्था मुस्तैद हो| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का राग भैरवी प्रशासनिक व सियासी गलियारों में गूंजने लगा है। दरअसल, शिवराज का यह राग उनकी बेचैनी जिसे वे तड़प कहते हैं, से उपजा है। अलसुबह सूबे के अफसरों से बार-बार उनकी सीधी चर्चा यही कहती है। संगीत के जानकार कहते हैं कि यह राग भाव अभिव्यक्ति के लिए अनुकूल तथा प्रभावकारी होता है। शिवराज तड़के की बैठकों में अपनी इसी अभिव्यक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर उनके साजिदे (मंत्री व ब्यूरोक्रेट) उनके सुरों के हिसाब से संगत नहीं दे पा रहे। दरअसल, मप्र की नौकरशाही में एक अजब किस्म की जड़ता है, अफसरों के अपने-अपने हस्तिनापुर हैं। जिलों में प्रभावी और सत्ताधारी दल के लोगों को एक अलग कुशन मिला हुआ है व पसंदीदा अफसरों की जमावटें भी हैं। यही छोटी से बड़ी हो जाने वाली घटनाओं का कारण है। जिस खरगोन के अफसरों को सरकार पहले क्लीनचिट देती रही, उन्हें ही शिवराज ने तीन सप्ताह बाद हटाया, फिर यही सिवनी में भी करना पड़ा और महाराज की ग्वालियर गुना रेंजमें भी इन कार्रवाईयों से शिवराज ने अपना इकबाल जरूर बुलंद किया लेकिन थोड़ी देर से| जाहिर है कि अपना बाड़ा कोई नहीं बिगाड़ता और कोई सियासतदां तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं करते, यह शिवराज भलीभांति जानते हैं। वे राजनीति के माहिर खिलाड़ी है। कॉमनमैन वाली सोच और लुक उनका प्लसपाइंट है, कुछ मौकों पर उन्होंने सटीक एक्शन लिया है। लेकिन, प्रशासन पर उनकी कमान, क्या उनके आसपास के अफसर ही जाने या अनजाने में कमजोर कर रहे हैं? गौर से देखने पर जवाब भी मिल जाता है। दरअसल शिवराज अपनी चौथी पारी में राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर बिल्कुल नई टीम के साथ काम कर रहे हैं। साफ है कि शिवराज के भाव और इशारे समझने वाले अब उनके आसपास नहीं है, वे हाईकमान तथा अवाम की उम्मीदों और अपनी हसरतों के बीच भारी-भरकम सीमेंट लोहे के जाल वाले वल्लभ भवन में कभी-कभी अकेले नजर आते हैं।
कहा जाता है कि राग भैरवी गाने का समय प्रातःकाल जरूर है। मगर यह राग गाकर महफिल समाप्त करने की परंपरा भी है।