देहदान सहित विभिन्न स्वास्थ्य विषयों को लेकर चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 94 वी ई संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा, सचिव डॉ कृपा शंकर चौबे समेत 31 सदस्यों ने अपने नेत्र एवं सम्पूर्ण देहदान के संकल्प पत्र हस्ताक्षर किए। जिसमें फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र सहित 16 सदस्यों ने अपने नेत्रदान एवं 15 ने अपना सम्पूर्ण सदस्य देहदान की घोषणा के साथ निर्धारित प्रपत्र ऑनलाइन भरकर इसकी प्रक्रिया पूर्ण की।

देश मे हर घंटे एक मौत: डॉ. भार्गव

देश के ख्याति प्राप्त चिकित्सक डॉ. राकेश भार्गव ने बताया कि हमारे देश में हर घंटे एक शख्स की मौत इसलिए हो जाती है क्योंकि उसे जीवन उपयोगी किडनी उपलब्ध नहीं होती है। शरीर का लगभग प्रत्येक अंग मृत्यु उपरांत किसी जरूरतमंद की जिंदगी को खुशहाल कर सकता है। नई चिकित्सकीय प्रविधियों के माध्यम से तो अब हड्डियां भी दान की जा सकती है।

35 व्यक्तियों के कठिनाइयां दूर -

डॉ. भार्गव के अनुसार एक व्यक्ति के देहदान से करीब 35 व्यक्तियों के जीवन की शारीरिक कठिनाइयों को स्थाई रूप से दूर किया जा सकता है। एक व्यक्ति जब अपने आंखें दान करता है तो वह चार लोगों को नेत्र ज्योति उपलब्ध कराने का पुण्य अर्जित करता है। उन्होंने बताया कि उन्नत तकनीक के चलते अब हड्डियों को भी दान किया जा सकता है। भोपाल एम्स में यह सुविधा उपलब्ध है। लंग्स जैसे अतिशय संवेदनशील अंग को दान कर भी लोगों की जीवन प्रत्याशा में 25 फीसद की बढ़ोतरी की जा सकती है। भोपाल एम्स में यह कार्य आरंभ हो गया है और अगले साल तक हमीदिया अस्पताल में भी किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी।

ब्रेन स्ट्रेम डेथ ईश्वरीय देन है: हरीश मंत्री

सामाजिक कार्यकर्ता हरीश मंत्री ने बताया कि अंगदान के लिए शरीर तभी योग्य होता है जब ब्रेन स्ट्रेम डेथ हो । ऐसी दशा में मस्तिष्क तक खून की आपूर्ति नहीं होती है। इसलिए अन्य अंग सक्रिय रहते है जबकि कार्डियक डेथ में ऐसा नहीं होता है। इसलिए मृत्यु का स्वरूप ईश्वरीय अनुकम्पा से ही तय होता है।