एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम, खुद को करें मानसिक रूप से तैयार

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स्टोरी हाइलाइट्स

मां का जीवन अपने बच्चे के इर्द-गिर्द घूमता है, उसने खाना खाया या नहीं, कपड़े आयरन करके रखने हैं, उनकी कोचिंग क्लास के लिए कहीं देर न हो जाए लेकिन जब बच्चा चला जाता है तो एक ठहराव आ जाता है। इसलिए जरूरी है कि खुद को मानसिक रूप से मजबूत कर लें। इस बात को आप स्वीकार करें कि बच्चे के सुखद भविष्य के लिए आप ये कर रही है और ये भी जीवन चक्र का एक चरण है। अब ये समय आपका है और आपको इसका सदुपयोग करना है।

अकेलेपन को कहें बाय.

हर अभिभावक का सपना होता है कि उसका बच्चा पढ़े-लिखे, उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपना उज्ज्वल भविष्य बनाए। आज के अभिभावक अपने बच्चों की उड़ान में रोड़ा नहीं बनना चाहते और वे उसे उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजने से भी गुरेज नहीं करते हैं, पर जब बच्चे अपने सुनहरे भविष्य की तरफ कदम बढ़ाते है तो अभिभावक खुश तो होते हैं, लेकिन हमेशा बच्चों के इर्द-गिर्द घूमने वाला उनका जीवन मानो थम-सा जाता है। भरपूर खुशियों के बीच भी उनके जीवन में एकाकीपन-सा आ जाता है। खासतौर से माताओं की जिंदगी में ऐसा ज्यादा होता है, ये अकेलापन उन्हें अखरने लगता है। यदि आपके साथ भी ऐसा ही है तो बस कुछ बातों का रखें विशेष ख्याल -

एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम

समय खुद पर अकेलेपन को हावी होने देने का नहीं बल्कि स्वयं को किसी काम में व्यस्त रखने का भी होना चाहिए। ताकि इस बदलते हुए समय को आप भली प्रकार से स्वीकारें और समय का सही सदुपयोग करें।

खुद को दें समय

अब ढेर सारा समय आपका अपना है। याद कीजिए अपने उन सपनों को जो आपने किसी बक्से में बंद करके छोड़ दिए थे, अब समय है उनको बाहर निकालने का शौक की कोई उम्र या सीमा नहीं होती, यदि आपको डांस का शौक था तो पैरों में बांध लीजिए घुंघरू और डांस क्लास ज्वाइन कर लीजिए, यदि आपको डांस अच्छे से आता है तो छोटे-छोटे बच्चों को डांस सिखाना शुरू कर दें। सिलाई, बुनाई, कढ़ाई या संगीत जो भी आपका शौक था, उसे फिर से अपनी जिंदगी में ले आएं।

अपने रिश्ते को दें समय

एक उम्र बीत जाती है बच्चों की देखरेख में और हम उसमें इतने रच-बस जाते हैं कि पति-पत्नी का रिश्ता उसमें खो-सा जाता है। तो बस इस समय को फिर से उन पुरानी सुनहरी यादों में ले जाएं, जहां आप एक-दूसरे का हाथ थामे एक-दूसरे के साथ में ही गुम हो जाते थे। अब एक दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताइए। सुबह-सुबह एक साथ टहलने जाएं, कभी-कभी ताश या लूडो की बाजी जमाएं। कभी किसी रेस्तरां में जाकर लजीज-सा डिनर कर आएं, एक दूसरे की पसंद की फिल्में देखें। इस समय को भी यादगार बना लें। रिश्तों को फिर से निभाएं

जिम्मेदारियों के चक्र में हम ऐसा उलझ जाते हैं कि नाते रिश्तेदार, दोस्त न जाने कहां पीछे छूट जाते हैं तो ये वो समय है, जहां आप अपने खोए हुए रिश्तों का साथ एक बार फिर से जोड़ लें। एक फैमिली गेट-टुगेदर प्लान कर सकते हैं या दोस्तों के साथ एक  बार फिर से जुड़ा जा सकता है। इसके अलावा वह जगह जहां आप घूमने जाने की इच्छा रखती एक थीं, लेकिन अपनी व्यस्तताओं के चलते नहीं जा पाईं, उन जगहों पर जरूर घूम कर आएं।

नए दोस्त बनाएं

अब आपके पास समय है आप अपनी पसंद के काम कर सकती हैं। चाहें तो क्रिएटिव क्लब की सदस्य बन सकती हैं या सामाजिक सेवा से जुड़े सरोकारों में भी अपनी सहभागिता निभा सकती हैं। ऐसा करके आप समाज का तो भला करेंगी ही साथ ही में नए दोस्त भी बना सकती हैं। किसी किटी पार्टी में जुड़ना चाहें तो वह भी कर सकती हैं। इतना खयाल रखें कि जीवन में आने वाले इस बदलाव को आप सहजता के साथ स्वीकार करें और अपनी जीवनशैली और दिनचर्या में सुधार लाने की कोशिश करें। आप यदि तनावमुक्त और खुशहाल रहेंगे तो आपके बच्चे भी सुनहरे भविष्य की ओर ऊंची उड़ान भर सकेंगे।