प्रेमी/पति द्वारा प्रेमिका/पत्नी की हत्या, या पत्नी द्वारा पति की हत्या, चिंता का सबब?

जब रिश्ते धधकते हैं तो परिणाम “दर्दनाक” रूप में सामने आते हैं| रिश्तों में इस हद तक खटास क्यों आती है कि जीवन का साथी जान का दुश्मन बन जाये|

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अदालतों में रिश्तो के नकारात्मक पक्ष को बहस और मुबाहिसों में देखा जा सकता है| ऐसी घटनाएं आम हैं| पहले ऐसा नहीं था ऐसा नहीं है, पहले भी रिश्तों में ऐसी घटनाएँ हुआ करती थीं|  

एक ही परिवार के दो लोग आपस में झगड़ते हुए अदालत के दरवाजे पर पहुंच जाते हैं| 

रिश्ते प्रेम का बंधन है लेकिन इस प्रेम की जगह जलन, घुटन, दुश्मनी कैसे जन्म ले लेती है? शादी विवाह तो एक-दूसरे को जोड़ने का बंधन है लेकिन इसमें हिंसा कहां से आ जाती है? इसमें एक दूसरे को धोखा देने की प्रवृत्ति कैसे पैदा हो जाती है? 

अवैध रिश्ते और अवैध प्रेम संबंध ही हत्या का कारण बताये जाते हैं लेकिन ये तस्वीर का एक पहलू है| अन्दर खाने में बहुत कुछ होता है जिस पर कम ही विचार होता है| पूरी दुनिया में यही हाल है हजारों महिलाओं को प्रेमी मौत के घाट उतार देते हैं और हजारों पुरुष ऐसे भी हैं जिनकी मौत का कारण उनकी पत्नी या प्रेमिका बनती है|

छोटी-छोटी बातों पर दरार इतनी गहरी हो जाती है कि रिश्ते शीतल छांव की जगह धधकती आग में तब्दील हो जाते हैं|

- विश्वास क्यों टूटता है?

- जब समाज मशीन की तरह हो जाता है| 

- भावनाओं का स्थान ब्रेन ले लेता है|

- रिश्तों में समय कम हो जाता है|

- विश्वास की दीवार दरक जाती है|

- मनोविकार सर चढ़कर बोलते हैं|

- अहम टकराता है| 

- नातेदार भड़काते हैं| 

- बुद्धि विवेक खो जाते हैं| 

- प्रभुत्व और अधिकार का भाव घर कर जाता है।

लेकिन सबसे बड़ा कारण एक खास रसायन भी होता है जो आग में घी का काम करता है।  

ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हो रहा है सदियों से रिश्ते इसी तरह के दौर पर खड़े नजर आते हैं। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी तो है लेकिन उसकी अपनी भावनाएं होती है। कई बार वह अपनी परिस्थितियों के कारण, किसी बाहरी व्यक्ति से अटैच हो जाता है तो कई बार कोई बाहरी व्यक्ति उसे अपने प्रेम जाल में उलझा लेता है। लेकिन इसमें एक ख़ास जीन भी अहम भूमिका निभाता है।

जो भी हो रिश्ते में यदि कहीं कोई गलतफहमी आ गई है।

जीवनसाथी यदि किसी के प्रति आकर्षित हो गया है। तब भी रिश्ता इस हद तक नहीं पहुंचना चाहिए कि दोनों एक दूसरे की जान के दुश्मन बन जाएं या अपने जीवन साथी को मौत के घाट उतार दिया जाए।

हर व्यक्ति का अपना व्यक्तित्व है और अपनी स्वतंत्रता।

यदि कोई स्थिति ऐसी है जो आपके बर्दाश्त के बाहर है या आपको लगता है कि आपका जीवन साथी आपको धोखा दे रहा है तो बैठ कर बात की जा सकती है या फिर उस रिश्ते को खत्म करने पर विचार किया जा सकता है।

इस पर भी मंथन किया जा सकता है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? क्यों ऐसी परिस्थिति बनी? क्या कोई रासायनिक लोचा है?

रिश्तो में इस तरह की खाई पैदा होने का कारण आर्थिक असुरक्षा एक कारण है। तमाम तरह की मनोवैज्ञानिक परिस्थितियां हैं। ऐसे बाहरी कारण है जो व्यक्ति को पहले से ही एग्जॉस्ट कर देते हैं, उसको मानसिक रूप से तनाव से भर देते हैं और ऐसे तनाव की स्थिति में व्यक्ति अपना आपा खो देता है। उसका धैर्य खत्म हो जाता है और रिश्ते तार-तार हो जाते हैं।

कोई एक कारण नहीं है रिश्तों में पनपते अपराध के पीछे। सामाजिक कारण हैं तो आर्थिक कारण भी।

व्यक्ति हताश और निराश है ऐसी स्थिति में यदि उसे घर पर धोखा मिलता है तो वह अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाता। 

वैवाहिक संबंध सबसे ज्यादा दाव होते हैं। व्यक्ति परेशान है, मानसिक स्थिति सही नहीं है तो उसका सीधा असर उसके जीवन साथी पर पड़ेगा। 

खास बात यह है कि रिश्तो में दरार के पीछे जीवनसाथी की मनोवैज्ञानिक स्थिति सबसे ज्यादा जिम्मेदार होती है। मनोविज्ञान कहता है कि एक व्यक्ति अनेक तरह के विकारों से ग्रस्त हो सकता है। हार्मोनल चेंजेज भी रिश्तो में दरार का कारण बनते हैं। 

किसी व्यक्ति में किसी को धोखा देने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है, किसी व्यक्ति में मल्टीपल पार्टनर्स रखने की, एक से अनेक लोगों से दोस्ती बनाने की स्वाभाविक रासायनिक स्थिति होती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात DRD4 gene (7 R+) (डोपामाइन रिसेप्टर D4) 

एक जीन है जो लोगों को बेबफा बनता है| इस जीन की मौजूदगी के कारण व्यक्ति रिस्क लेता है अपने साथी को धोखा देता है, कई पार्टनर्स बनाता है|  DRD4 "रोमांच चाहने वाला" जीन है, जो शराब और जुए की लत के लिए भी जिम्मेदार है। जीन व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करता है। हैरत में आ गए ना आप ये छिपा हुआ रुस्तम ही कई व्यक्तियों को धोखेबाज़ और बेवफा बना देता है| 

सदियों से लोग इस तरह का बर्ताव करते आए हैं| पुराने जमाने में कोई समर्थ पुरुष एक ज्यादा स्त्रियों से संबंध रखता था, तो कोई एक ही विवाह करता था| 

अब बहू पति-पत्नी प्रथा नहीं है| अब समय और कानून एक ही विवाह की अनुमति देता है| लेकिन इसके बावजूद भी मानव की प्रवृत्ति है| 

आकांक्षाएं/ एंबीशंस, प्रभुत्व जमाने की प्रवृत्ति,घर वालों का बेवजह भड़काना या रिश्तो के बीच में आना भी रिश्तों के टूटने का कारण बनते हैं|

अदालतों में ऐसे कई मामले आते हैं जिनमें यह पता चलता है कि जीवन साथी-साथी का दुश्मन नहीं है बल्कि उनके बीच में दुश्मनी, गलतफहमी पैदा की गई| त्याग, सामंजस्य, सहनशीलता एक दूसरे को समझना, एक दूसरे को जैसे हैं वैसा ही स्वीकार करना, रिश्तो के लिए अमृत का काम करते हैं|

एकाधिकार और ईगो, खुद को बेहतर मानना और बताना, सामने वाले को किसी न किसी रूप में अपमानित, आहत करना, उसके रिश्तेदारों, दोस्तों, आदतों के नाम से उसे तंग करना भी रिश्ते के लिए विष का काम करते हैं|

एक दूसरे की अवहेलना करना, एक दूसरे की फीलिंग का ख्याल ना रखना, दूसरे को अपने मुताबिक चलाना भी रिश्तो में कठिनाई पैदा करता है|

दांपत्य जीवन में कड़वाहट के कारणों को गिना जाए तो इनकी फेहरिस्त बहुत लंबी हो जाएगी| लेकिन सहजता, इंसानियत, सद्भावना, प्रेम के साथ यह सारी कठिनाइयां और इतनी बड़ी लिस्ट कहीं नहीं टिकेगी|

एक छोटी सी बात रिश्ते को प्रेम की डोर में बांध सकती है और एक छोटी सी बात रिश्ते की डोर को तोड़ सकती है|

संवाद सबसे बड़ा उपाय है रिश्तों की दूरी कम करने का| लेकिन संवाद तभी संभव है जब इगो, श्रेष्ठता का भाव हटा दिया जाए, एक दूसरे पर अधिकार जताने की प्रवृत्ति दूर कर दी जाए|