ऐसे कई उदाहरण आज के समय में मिल जाएंगे। लेकिन कहते हैं ना दूरियां शहरों की भले ही रहें, मन तक न पहुंचे तो कोई भी रिश्ता लंबे समय तक टिक सकता है। ऐसा ही कुछ लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप (एलडीआर) का भी हाल है। यहां मन मिले होते हैं तो दिलों की यह दूरियां कोई मायने नहीं रखतीं।

मैं तुझसे दूर कैसा हूं/ तू मुझसे दूर कैसी है/ ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है... कुमार विश्वास की ये पंक्तियां साथी से दूर रहने वाले युगल के दर्द को बखूबी बयां करती हैं। जी हां, जिंदगी बचपन में पढ़ी राजा-रानी की कहानी-सी कहां होती है, जिसके अंत में लिखा होता कि इस तरह उनकी शादी हुई और वे एक-दूसरे के साथ ताउम्र खुशी-खुशी रहने लगे.

बेशक यह 'दूरी खलती है, पर जरा अलग नजरिए से देखें तो इससे रिश्तों की कद्र बढ़ती है। एक-दूसरे के साथ को 'मिस करना और मिलने का मौका तलाशना, संबंध को अधिक प्रगाढ़ और तरोताजा बनाता है। 

रिलेशनशिप एक्सपर्ट साइकोथेरेपिस्ट लॉरी गॉटलिब की मानें तो साथ रहने वालों की तुलना में अलग शहरों में रहने वाले कपल अधिक सार्थक संवाद करते हैं और एक-दूसरे को बेहतर समझ पाते हैं। भले बिताए गए समय की अवधि कम होती, पर गुणवत्ता कहीं ज्यादा होती है। ये साथ मिले समय को क्वालिटी के साथ जीते हैं।

दूर रहने से ऐसे रिश्तों में एक हेल्दी स्पेस पनपने की गुंजाइश रहती है जो रिश्तों को बेहतर बनाती है। यह स्पेस संबंधों के लिए खाद-पानी का काम करता है। 

लिहाजा, भले दूर रहना आपकी मजबूरी है, पर भावना सच्ची है तो आपके संबंध फलेंगे-फूलेंगे ही। पहले की तुलना में यह कल्चर अब अधिक सहज भी है। दरअसल, परिवार में डबल इनकम आम और नेशनल फैमिली हेल्थ सर्व की हालिया रिपोर्ट के अनुसार पति-पत्नी की एजुकेशनल और प्रोफेशनल क्वॉलिफिकेशन का फासला दिनों दिन कम हो रहा है, ऐसे में परिवार चलाने के लिए दंपती अपने करियर को दांव पर नहीं लगाते।

ये अलग-अलग शहरों में नौकरी भले ही करें लेकिन परिवार और समाज भी इसे सहज मानते हुए अपना रहा है।

दूरियां नहीं रखती हैं मायने, धैर्य व समर्पण के साथ..

रिश्तों को सहज बनाए रखें:

लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में समर्पण और धैर्य की कीमत सबसे ज्यादा है। यदि दोनों में से एक साथी भी पल भर को भी अपने समर्पण से पीछे हटता है, फिसलता है तो पूरे परिवार को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। 

सच पूछिए तो तकनीक की तमाम सुविधाओं के बावजूद पति-पत्नी का एक-दूसरे से दूर रहना किसी तपस्या से कम नहीं। कुछ महत्वपूर्ण कारण और मसले ही उन्हें अपने प्रिय से दूर रहने को मजबूर करते हैं। 

बेशक गृहस्थी का गुलजार नहीं रहना कसक देता है, पर यह भी उतना ही बड़ा सच है कि दूर रह कर काम का फैसला भी आपका था। ऐसे में इसकी चुनौतियों को भी आपको ही स्वीकार करना होगा। अपनी इच्छा शक्ति को अपने सयंम को कभी कमजोर नहीं पड़ने दें।

जुड़ा रहे भावनात्मक साथ:

मनोवैज्ञानिक मीनाक्षी कुजूर कहती हैं कि साथी को ऐसे समय में फोन करना, जब उसके काम में बाधा न आए, यह सबसे खास बात होती है। बातचीत के दौरान मन की भावनाएं एक-दूसरे से उसी तरह जुड़ी होती हैं, जैसे कोई आमने-सामने बैठा हो। 

एक-दूसरे के खाने की चिंता से लेकर पूरे दिन की क्या-क्या गतिविधियां रहीं, यह फोन पर बताने से ही दोनों के बीच की यह दूरी खलती नहीं है। ऐसा महसूस होता है कि दोनों पास रहकर ही एक-दूजे के हालचाल कह-सुन रहे हैं।

टेक्स्ट मैसेज भेजें: समय-समय पर अपने पार्टनर को अपनी याद दिलाने के लिए छोटे छोटे टेक्स्ट मैसेज और इमोजी का सहारा लें। इससे भी साथी को खुशी मिलती है।

छोटी-छोटी बातें बहुत काम की...

ट्रिप एक्सचेंज: जब एक साथी को आने में असुविधा हो तो तुरंत दूसरा साथी अपने जाने की तैयारी कर लें। कभी-कभी ट्रिप एक्सचेंज का फार्मूला भी आपके साथी को न सिर्फ खुशी देगा, बल्कि उनके बेहद भागदौड़ भरे रूटीन में कुछ राहत भी मिलेगी।

पूरे परिवार की खुशियां आपसे ही जुड़ी हैं..

सरप्राइज दें: हर बार जब आने-जाने की तारीखें तय हों तो इस बीच एक-दो सरप्राइज ट्रिप का प्लान करके साथी को खुशी दी जा सकती है। यदि ऐसा न भी हो तो उनके आने पर उनके लिए कुछ सरप्राइज गिफ्ट तो रखा ही जा सकता है, जो उनके ट्रिप की सारी थकान को पल भर में ही हटा दे।

रूठने-मनाने की स्थिति न आए: अचानक ऑफिस में आए किसी जरूरी काम के कारण यदि साथी की ट्रिप कैंसिल भी होती है, तो ऐसे में रूठने के बजाय स्थितियों को समझने की कोशिश करें।

पूरे दिन में एक समय ऐसा रखें जब आप अपने परिवार के बारे में, परिवार के सदस्यों के बारे में एक-दूसरे से चर्चा कर सकें। उनकी खुशियों के लिए भी आप दोनों को क्या प्रयास करने हैं, इस बात से हमेशा अवगत रहें। ताकि पारिवारिक स्थितियों से भी आप दोनों अनभिज्ञ न रहें। अपने साथ-साथ परिवार के लिए भी हर वह प्रयास करें, जिससे सबको खुशी मिल सके। 

कभी-कभी दोनों मिलकर परिवार के उन सदस्यों के घर भी जाएं, जिनसे आप काफी समय से न मिले हों या फिर किसी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए पहले से अपनी छुट्टियां तय कर लें। जिससे आपकी उपस्थिति से सभी को अच्छा लगे और आप भी खुशी महसूस करें।

शुक्रिया तकनीक का- कि अब पिया का हाल जानने के लिए हमें पोस्टमैन, खबरिया या कबूतर के इंतजार में पल-पल गिनने की दरकार नहीं है। एक क्लिक में अक्षरों में या तस्वीर के जरिए ही नहीं, दिल का हाल सीधे लाइव बात कर जान सकते हैं। 

मनोवैज्ञानिक मीनाक्षी कुजूर कहती हैं कि दूर रहने वालों को साथी के साथ स्काइप, वेबकैम आदि से लगातार बातचीत करते रहना चाहिए। स्मार्ट डेटिंग एकेडमी की फाउंडर बेला गांधी तो यहां तक कहती हैं कि स्काइप आदि वीडियो कॉल के जरिए आप दो अलग शहर में रहते हुए भी साथ-साथ फिल्म इंजॉय करें। 

साथ ऑनलाइन क्विज/गेम खेलें। गुड मॉर्निंग और गुड नाइट वीडियो कॉल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यह आदत आपको आपके साथी के साथ होने का अहसास जगाएगी। साथ ही इस तकनीक को भी शुक्रिया कहिए, जिसने आज के समय में दूरियों को नजदीकियों में बदलने की कोई कसर नहीं छोड़ी है और मीलों दूर से भी यह रिश्ते बेहतर तरीके से निभाए भी जा रहे हैं।