फंगल इंफेक्शन कई तरह के फफूंद की वजह से होता है...


स्टोरी हाइलाइट्स

फंगल इंफेक्शन को दूर करने में इस तेल को बहुत उपयोगी माना जाता है। वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार इस तेल से 15 तरह के फंगल इंफेक्शन को दूर किया जा सकता है।

फंगल इंफेक्शन गल स्किन कई तरह के फफूंद की वजह से होता है, जिनमें डर्मेटोफाइट्स और यीस्ट प्रमुख है। स्किन फंगल इंफेक्शन में त्वचा पर सफेद पपड़ी जम जाती है, जिसमें खुजली होती है। खुजली की समस्या कई बार इतनी बढ़ जाती है कि त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं। 

ऐसे में चिकित्सक की सलाह के साथ ही आप कुछ खास तरह के असेंशियल ऑयल का उपयोग कर सकते हैं। ये ऑयल्स प्रभावी तरीके से त्वचा का संक्रमण दूर करते हैं। इनसे किसी तरह का साइड इफेक्ट भी नहीं होता लेकिन इन ऑयल्स का उपयोग सीधे नहीं किया जाना चाहिए। इन्हें किसी अन्य तेल में कम मात्रा में मिलाकर ही काम लें।

क्लोव असेंशियल ऑयल:

फंगल इंफेक्शन को दूर करने में इस तेल को बहुत उपयोगी माना जाता है। वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार इस तेल से 15 तरह के फंगल इंफेक्शन को दूर किया जा सकता है। वर्ष 2010 में हुए एक अन्य अध्ययन के अनुसार लौंग का तेल कैंडिडा इन्फेक्शन को दूर करने में प्रभावी होता है। इस तेल को किसी अन्य तेल में समान मात्रा में मिलाकर ही काम में लें। सीधे त्वचा पर प्रयोग नहीं करना चाहिए। फंगल इंफेक्शन के साथ ही दांतों संबंधी समस्या में भी यह तेल असरदार होता है।

लेमनग्रास असेंशियल ऑयल:

इस तेल की हीलिंग प्रोपर्टीज भी फंगल इंफेक्शन को दूर करने में असरदार होती है। लेमनग्रास ऑयल फंगस को अंदर तक समाप्त कर देता है। इस तरह बार-बार बनने वाले फंगस से राहत पाई जा सकती है। दाद-खाज में इस तेल को ज्यादा असरदार माना जाता है। इसे भी त्वचा पर सीधे नहीं लगाना चाहिए।

लैवेंडर असेंशियल ऑयल:

इस असेंशियल ऑयल से भी कई तरह के औषधीय लाभ लिए जा सकते हैं। कैंडिडा और अन्य त्वचा संबंधी संक्रमण को दूर करने में लैवेंडर असेंशियल ऑयल बहुत असरदार होता है। फंगल इंफेक्शन की वजह से सेल्स को क्षतिग्रस्त होने से रोकने के लिए लैवेंडर असेंशियल ऑयल का आप किसी अन्य तेल में मिलाकर उपयोग में लें।

थाइम असेंशियल ऑयल का उपयोग करें

कुछ अध्ययनों के अनुसार असेंशियल ऑयल फंगल में प्रभावी तरीके से काम करते हैं। इन्हीं में एक थाइम असेंशियल ऑयल को भी शामिल किया गया है। इस तेल का सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए, नहीं तो यह एलर्जी का कारण बन सकता है। त्वचा संक्रमण को दूर करने के अलावा थाइम ऑयल सांस संबंधी समस्याओं से भी राहत देने का काम करता है। फूड को प्रिजर्व करने के लिए इस तेल का उपयोग किया जा सकता है। यह फंगस और बैक्टीरिया को पनपने से रोकने का काम करता है। इसमें कैंसर रोधी गुण भी होते हैं।

टी ट्री असेंशियल ऑयल:

टी टी असेंशियल ऑयल को भी बहुत असरदार माना जाता है। फूट कॉर्न और कैंडिडा के संक्रमण को दूर करने में इस तेल का उपयोग किया जा सकता है। इस तेल में पावरफुल एंटी बैक्टीरियल प्रोपर्टीज होती हैं। इस बहुत ही कारगर एंटी फंगल ऑयल माना जाता है।

ऑरिगेनो ऑयल:

पिज्जा टॉपिंग के लिए ऑरिगेनो का प्रयोग सबसे लोकप्रिय है। इसकी पावरफुल एंटी फंगल प्रॉपर्टीज फंगल इंफेक्शन को दूर करती है। एथलेटिक फुट और फंगल नेल इन्फेक्शन की समस्या से राहत पाने के लिए ऑरिगेनो असेंशियल ऑयल का प्रयोग किया जा सकता है।

मनुका असेंशियल ऑयल:

यह नेचुरल एंटी माइक्रोबियल असेंशियल ऑयल संक्रमण से बचाने में बहुत कारगर माना जाता है। इस तेल में स्ट्रांग एंटी ऑक्सीडेंट्स और एंटी बैक्टीरियल क्षमताएं भी होती हैं। इस तेल को कई तरह की समस्याएं जैसे एथलेटिक फुट, डैंड्रफ, कैंडिडा आदि के लिए उपयोग किया जा सकता है।

दालचीनी असेंशियल ऑयल:

दालचीनी की छाल का प्रयोग मसाले के रूप में किया जा सकता है। इसमें एंटी इंफ्लेमेट्री, एंटी सेप्टिक और एंटी माइक्रोबियल क्वालिटी होती हैं। यह इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने के साथ ही एंटी फंगल का काम भी करती है। इसका तेल भी बहुत पावरफुल होता है, इसलिए इसे सीधा न लगाएं।

फफूंद संक्रमण:

फंगल इंफेक्शन त्वचा की सामान्य स्थितियां हैं जो मानव शरीर के अंदर या अंदर कहीं भी विकसित हो सकती हैं। Fungi रिलीज बीजाणु जो सीधे संपर्क से या यहां तक ​​​​कि साँस द्वारा उठाए जा सकते हैं। फंगल संक्रमण शरीर पर कहीं भी बढ़ सकता है, लेकिन गर्म, नम क्षेत्रों जैसे कि पैर, कमर और बगल के क्षेत्र में विकसित होता है। वे लाली, खुजली, जलन और स्केलिंग, साथ ही फफोले या छीलने का कारण बन सकते हैं। सामान्य प्रकार के फंगल संक्रमणों में एथलीट फुट, जॉक खुजली, दाद और खमीर संक्रमण शामिल हैं।

फंगल संक्रमण के प्रकार:

फंगल इंफेक्शन शरीर पर या उसके भीतर कहीं भी हो सकता है। सबसे आम प्रकार निम्नलिखित हैं:

एथलीट फुट, पैर और पैर की उंगलियों का फंगल संक्रमण|

जॉक खुजली, कमर और बगल के क्षेत्र का एक कवक संक्रमण, Yeast संक्रमण, जिसे कैंडिडिआसिस भी कहा जाता है|

दाद, त्वचा और खोपड़ी का एक कवक संक्रमण|

Onychomycosis, या नाखून और नाखून के bed का संक्रमण

साइनस संक्रमण|

अधिकांश फंगल संक्रमण अत्यधिक संक्रामक होते हैं और मानव-से-मानव, पशु-से-मानव या वस्तु-से-मानव में फैल सकते हैं। जबकि मानव शरीर के कई हिस्सों में प्रतिरक्षा तंत्र होते हैं जो फंगल संक्रमण से लड़ते हैं, अगर प्रतिरक्षा प्रणाली weak है तो वे फैल सकते हैं। इसके अतिरिक्त, एंटीबायोटिक दवाओं का लंबे समय तक use या हार्मोन में बदलाव, जैसे कि महिलाओं में रजोनिवृत्ति, भी शरीर को फंगल संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बना देगा।

फंगल संक्रमण की रोकथाम:

फंगल संक्रमण को रोकने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

एंटीबायोटिक्स या स्टेरॉयड के लंबे समय तक उपयोग से बचना,

संतुलित आहार लेना,

मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर का उचित प्रबंधन,

शरीर को साफ और सूखा रखना,

रोज मोजे और अंडरवियर बदलना,

नंगे पांव चलने से बचना,

पुराने जूते, जूते और चप्पलों को त्यागना,

बार-बार हाथ धोना, खासकर जानवरों या अन्य लोगों के संपर्क में आने के बाद

मिट्टी या धूल के निकट संपर्क से बचना, जैसे कि बागवानी के माध्यम से

चेहरे पर फंगल इंफेक्शन, हाथों पर फंगल संक्रमण, 

चित्रों के साथ फंगल संक्रमण के प्रकार:

त्वचा कवक संक्रमण चित्र,

मनुष्यों में फंगल संक्रमण,

फंगल संक्रमण उपचार,

फंगल संक्रमण के प्रकार,

फंगल संक्रमण से जुड़े सामान्य लक्षण:

Skin discolouration, 

Inflammation,

Cough,

Chest congestion,

Weakened toe/finger nails,

Vaginal discharge,

Itchiness,

Digestive disturbances,

Sinusitis,

Rhinitis,


 

पुराण डेस्क

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