नई दिल्ली: 378 दिनों के बाद, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने आज घोषणा करते हुए कहा कि वह किसानों आंदोलन वापस ले रहें है. किसान संघों की बैठक के बाद आज आंदोलन की समाप्ति की घोषणा की गई है. 11 दिसंबर कों विजय दिवस बनाकर किसान दिल्ली की सीमा से निकल जाएंगे. गुरुवार सुबह सरकार की ओर से आधिकारिक पत्र मिलने के बाद दोपहर में किसानों की बैठक हुई, जिसके बाद किसानों ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा की. आंदोलन खत्म करने की घोषणा के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने लिखा, अपना देश महान है, यहाँ सत्याग्रही किसान है ! सत्य की इस जीत में हम शहीद अन्नदाताओं को भी याद करते हैं.
अपना देश महान है,
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 9, 2021
यहाँ सत्याग्रही किसान है!
सत्य की इस जीत में हम शहीद अन्नदाताओं को भी याद करते हैं।#FarmersProtest #SatyaKiJeet pic.twitter.com/L1JeJ8Tf1N
सरकार की ओर से किसानों को पत्र :
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की बैठक के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया. 15 दिसंबर तक किसान दिल्ली की सीमा से चले जाएंगे. गुरुवार की सुबह सरकार की ओर से आधिकारिक पत्र मिलने के बाद गुरुवार दोपहर को किसानों की बैठक हुई, जिसके बाद किसान आंदोलन की समाप्ति की घोषणा की गई. 10 दिसंबर को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हुए जवान और सीडीएस बिपिन रावत के अंतिम संस्कार के चलते किसान जश्न नहीं मनाएंगे और शोक सभा करेंगे. उसके बाद 11 दिसंबर को दिल्ली बार्डर पर जुलूस निकाला जाएगा और उसी दिन किसान अपने घरों को लौट जाएंगे.
नहीं तो फिर आंदोलन होगा :
आंदोलन के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा, "हम सीमा पर रहेंगे और कल के हेलीकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हुए सैनिकों की याद में देश के साथ शोक व्यक्त करेंगे." इसके बाद 11 दिसंबर से घर वापसी की यात्रा होगी. हम शहीद किसानों के परिवारों से भी मिलने जा रहे हैं. हालांकि हमने आंदोलन वापस ले लिया, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है.
समझौता नहीं हुआ तो फिर होगा आंदोलन :
पत्रकार वार्ता में किसान नेता गुरनाम सिंह चादुनी ने कहा- सभी पत्रकारों को धन्यवाद. हमने इस आंदोलन को स्थगित कर दिया है और हर महीने इसकी समीक्षा की जाएगी. 15 जनवरी को बैठक है, अगर सरकार ने कुछ विश्वासघात किया तो हम भी आंदोलन शुरू कर देंगे. समन्वय समिति के सदस्य हनान मौला ने कहा, "यह आजादी के बाद से सबसे बड़ा और सबसे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन था. संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सभी को बधाई."