पर्यावरणीय चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की..

दरअसल यह अनुमति मिलने के बाद चारधाम परियोजना के तहत भारत की चीन तक पहुंच और आसान हो जाएगी और किसी भी मौसम में भारतीय सेना चीन से सटी सीमाओं पर पहुंच सकेगी। 

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हाईवे निर्माण के लिए सड़क की चौड़ाई बढ़ाने में रक्षा मंत्रालय की कोई दुर्भावना नहीं है। अदालत सशस्त्र बलों की ढांचागत जरूरतों का अनुमान नहीं लगा सकती है। इस परियोजना का उद्देश्य सड़कों को 10 मीटर तक चौड़ा करना है। 

उल्लेखनीय है कि यह परियोजना बहुचर्चित रही है तथा इसके तहत सड़कों को चौड़ा करने की मंजूरी की इसे दरकार थी। चारधाम योजना मूलतः गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को सड़क मार्ग से जोड़ने की योजना है, जिसका मकसद इन तीर्थों तक ऑलवेदर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। इसी रूप में योजना को पेश भी किया जाता रहा है। जब इसे अदालत में चुनौती गई, तब सुनवाई के दौरान इसका रक्षा से जुड़ा पहलू उभर आया। 

सरकार ने बताया कि इस योजना के तहत बनी सडक भारत चीन सीमा तक साजोसामान पहुंचाने का जरिया बनेगी। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बाकायदा उदाहरण देकर बताया कि हमारी ब्रह्मोस मिसाइल 42 फीट लंबी है। 

जाहिर है, इसे ले जाने के लिए सेना को बड़े वाहनों की जरूरत होगी। सड़क की चौड़ाई कम करने से वह मकसद पूरा नहीं होगा। एलएसी पर भारत और चीन के बीच हाल में उभरे तनाव को देखते हुए आसानी से समझा जा सकता है कि सरहद तक सैन्य आपूर्ति का सुगम मार्ग हर वक्त उपलब्ध रहना कितना जरूरी है। 

गौरतलब है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि सेना ने कभी सड़क चौड़ी करने की मांग नहीं की। लेकिन यह समझा जाना चाहिए कि देश की सुरक्षा के मद्देनजर इन्फ्रास्ट्रक्कर का विकास सरकार की एक अहम स्थायी जिम्मेदारी है। जरूरी नहीं कि हर बार यह कार्य घोषित रूप में ही किया जाए। अक्सर यह अजेंडा अघोषित और गोपनीय रूप में भी आगे बढ़ाया जा सकता है। 

लेकिन पर्यावरण से जुड़ा पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। खासकर हाल के दिनों में आई त्रासद आपदाओं ने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि यह पूरा क्षेत्र पर्यावरण के लिहाज से कितना संवेदनशील है। स्वाभाविक ही सुप्रीम कोर्ट ने देश की रक्षा जरूरतों को अहमियत देते हुए भी पर्यावरण संबंधी चिंताओं की अनदेखी नहीं की। 

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके सीकरी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जो इस बात का ध्यान रखेगी कि चारधाम परियोजना के काम के दौरान पर्यावरण संबंधी तमाम दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। 

समिति को नए सिरे से पर्यावरण संबंधी खतरों का आकलन करने का अधिकार नहीं दिया गया है, लेकिन वह अब तक के सभी निर्देशों पर अमल सुनिश्चित करने का काम करेगी। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला बताता है कि संवेदनशील और जटिल मामलों में कैसे संतुलित दृष्टिकोण आगे बढ़ने का रास्ता खोल देता है। चारधाम परियोजना पूरी होगी तो कई सारे नये अवसर भी उपलब्ध होंगे