यह उस वक्त है जब पंजाब जैसा राज्य विधानसभा चुनाव की दहलीज पर है। यहां निकाय चुनाव में भाजपा के डेढ दशक के वर्चस्व को तोड़ते हुए आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। खास बात तो यह कि पहली बार चुनाव लड़ रही आप की धमाकेदार एंट्री ने सभी दलों को चौंका दिया है।
अब यह पार्टी इन परिणामों को ट्रेलर बताकर फिल्म पंजाब में दिखाने की बात कर रही है। जाहिर बात है कि पहली बार चुनाव लड़ने से हासिल अप्रत्याशित कामयाबी की वह आसन्न पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर मनमाफिक व्याख्या कर सकती है। इस चुनाव में नये चेहरे आप ने उतारे और वे कामयाब रहे।
वर्तमान व तीन पूर्व मेयरों का हारना भी इस बात का संकेत है कि जनता बदलाव के मूड में आ रही है। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व यह चुनाव परिणाम भाजपा को परेशान करने वाला है। तो क्या यह माना जाए कि इन चुनावों में महंगाई का मुद्दा चला?
हाल ही में हिमाचल की एक संसदीय व तीन विधानसभा सीटों पर पार्टी की हार के बाद कहा गया था कि महंगाई का मुद्दा हावी रहा। कहा जा सकता है कि इन चुनावों में किसानों का मुद्दा भी प्रभावी रहा।
दरअसल, नगर निगम की सीटों में विस्तार के लिये कुछ ग्रामीण इलाके भी चंडीगढ नगर निगम क्षेत्र में शामिल किये गये, जिनमें भाजपा को असफलता हाथ लगी। वहीं कांग्रेस के लिये परिणाम नितांत निराशाजनक हैं क्योंकि वह निगम चुनाव में तीसरे स्थान पर जा पहुंची है।
जब इन परिणामों को पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में देखा जायेगा तो पार्टी के लिये यह चिंता का सबब है। मगर पंजाब में कांग्रेस की गुटबाजी और पार्टी नेताओं का एक दूसरे पर खुलकर वार जनमानस को रास नहीं आ रहे हैं। मगर परिणामों से उत्साहित आप के नेता इसे पंजाब के चुनावों का ट्रेलर बता रहे हैं तो उसे पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता।
दरअसल चंडीगढ़ में साठ फीसदी आबादी पंजाब मूल की है, जिसके मूड को देखते हुए पंजाब में आप के फायदे में होने का आकलन किया जा रहा है। दरअसल, चंडीगढ़ में भाजपा की शिकस्त के कई कारण हैं। इन चुनावों में एक तो मोदी फैक्टर नहीं था। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने इस चुनाव को लेकर अधिक गंभीरता नहीं दिखायी।
पंद्रह साल से नगर निगम की सत्ता में रहने की वजह से पार्टी में नया जोश नजर नहीं आया। शहर के लोग भी नगर निगम की कारगुजारियों से खुश नजर आये। ब्यूटीफुल सिटी कहे जाने वाले शहर का ताज कब छिन गया, लोगों को पता ही नहीं चला|
स्वच्छता सर्वेक्षण में चंडीगढ़ के 66 वें स्थान पर आने से लोग नारपुरा भी थे। हालांकि कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी की इस धमाकेदार एंट्री के मूल में 'मुफ्त का चंदन घिस रघुनंदन' वाला मुहावरा चरितार्थ हुआ है। यानी मुफ्त का मॉडल पार्टी के लिए बेस्ट साबित हुआ है।
क्या मुफ्त बिजली-पानी वाला मॉडल चंडीगढ़ के लोगों को भी रास आया है? बहरहाल पंजाब के लिये आप का दखल ऐसे वक्त हो रहा है जब कांग्रेस के भीतर के बिखराव से भाजपा उत्साहित है और कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेटवर्क के चलते अपनी उड़ान की संभावना देख रही है।